
RANCHI मेयर डॉ आशा लकड़ा को अपमानित करने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने झारखंड के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि हाई पावर कमेटी का गठन कर इस मामले की स्वतंत्र जांच कराएं। साथ ही नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से की गई जांच रिपोर्ट को पुनः सत्यापित करें। इसके अलावा नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव को 25-27 मार्च 2021 और 30 सितंबर को हुई रांची नगर निगम बोर्ड की बैठक से संबंधित फाइल की कॉपी समेत अन्य दस्तावेजों के साथ राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की आगामी बैठक (सुनवाई) में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह जानकारी मेयर डॉ आशा लकड़ा ने दी।
तत्कालीन नगर आयुक्त ने कार्रवाई नहीं की
मेयर ने बताया कि इससे पूर्व राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 18.11.2022 को समन जारी कर नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव व रांची नगर निगम के नगर आयुक्त को 05.12.2022 को आयोग के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था। आयोग के इस समन के बाद रांची नगर निगम के वर्तमान नगर आयुक्त शशि रंजन 5 दिसंबर 2022 को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने आयोग के चेयरमैन को बताया कि वे हाल ही में रांची नगर निगम के नगर आयुक्त पद पर योगदान दिए हैं। रिपोर्ट में यह पाया गया कि पूर्व में रांची नगर निगम में जो भी हुआ उस पर तत्कालीन नगर आयुक्त मुकेश कुमार ने कोई कार्रवाई नहीं की। हालांकि मेयर ने कानून को ध्यान में रखते हुए अपनी शक्ति का प्रयोग किया।
एक पक्षीय रिपोर्ट की आई सामने
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने यह भी पाया कि इस मामले को लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव ने जिस जांच रिपोर्ट को आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया था, वह एक पक्षीय है। नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव ने सही तरीके से इस मामले की जांच ही नहीं कराई। इससे यह स्पष्ट है कि अधिकारी लाभ उठा रहे हैं और अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिला होने के नाते मेयर डॉ. आशा लकड़ा के साथ भेदभाव कर रहे हैं।
ये थी शिकायत
- पूर्व नगर आयुक्त मुकेश कुमार ने अपने कार्यकाल में लगभग 577 करोड़ रुपये की 298 योजनाओं का कार्यादेश दिया था, जिसे न तो निगम बोर्ड के एजेंडा में शामिल किया गया और ना ही मेयर को इसकी जानकारी दी गई। पूर्व नगर आयुक्त के इस कार्यादेश से रांची नगर निगम में बहुत बड़ा घोटाला किए जाने की संभावना है। उच्च स्तरीय स्वतंत्र कमेटी के माध्यम से इसकी जांच कराने की आवश्यकता है, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो
- सभी योजनाओं की रूपरेखा इंजीनियरिंग शाखा के माध्यम से बनाई गई। इसके बाद नगर आयुक्त मुकेश कुमार के माध्यम से इसे नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजा गया था।