
रामगढ़।
‘बृहद झारखंड कला संस्कृति मंच’ के आह्वान पे ‘सोहराई चांचइर आर बरदखूंटा’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ हजारों कला-संस्कृति प्रेमियों के जत्थे के साथ सुबह 11 बजे जिला मैदान से शुरू हो कर गांधी चौक,सुभाष चौक,ब्लॉक चौक होते हुए रामगढ़ कॉलेज मैदान पहुँचा। इस दौरान रोमांचित करने वाला आकर्षक बरदखूंटा में अहीरा /चांचइर गीत से गुंजयमान हो उठा।
कार्यक्रम में बृहद झारखंड कला संस्कृति मंच के सदस्य ओम प्रकाश महतो ने कहा कि, “इस तरह का आयोजन इस बृहद झारखंड में पहला,अनूठा और ऐतिहासिक है। हमारा उद्देश्य है कि झारखंड की संस्कृति विरासत के पूर्जागरण के साथ बृहद झारखंड को एक नए सिरे उठाना और जीवित करना है, तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पे पहचान स्थापित करना है। झारखंड की सोहराई आर्ट जो पूरे दुनिया के कला प्रेमियों को आकर्षित कर रही है, पिछले वर्ष सोहराई पेंटिंग को जीआई टैग भी मिल चुका है। जिससे स्पष्ट है,सोहराई सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल में स्थापित होने से कोई नही रोक सकता,आगे इस प्रकार के आयोजन को और भी भव्य, बृहद किए जाने की योजना है।”
द्वारिका प्रसाद ने कहा की, “हमारे झारखंड की बेहद ही गौरवपूर्ण कला संस्कृति जो कहीं न कहीं आधुनिकता के चपेट में आ कर खोती सी जा रही थी और युवा वर्ग इनसे दूर होते जा रहे है,उनको सुरक्षित और संरक्षित करने के उद्देश से इस प्रकार के कार्यक्रम को आयोजन आयोजित किया गया। आयोजन के दूसरे वर्ष में ही हमने देखा कि युवा वर्ग को बस राह दिखाने भर की देरी है युवा इसे उच्चतर स्तर पे स्वयं ले जाएंगे।
संतोष महतो टिडुआर ने कहा कि “हमारा ये प्रयास और आयोजन का उद्देश्य युवा पीढ़ी जो धीरे-धीरे अपनी कला,संस्कृति,परंपरा और सभ्यता से दूर होते जा रही है उनमें अपनी इन गौरवपूर्ण संस्कृतिक विचार का संचार करना है। इस कार्यक्रम में हम देख रहे है कि सबसे ज्यादा युवा वर्ग ही बढ़-चढ़ के हिस्सा लिए। कला,संस्कृति और परंपरा का आधार जहां बूढ़े-बुजुर्ग है, तो उस आधार पे इमारत बनाने के वाहक हमारे युवा हैं, और यदि युवा ही इससे कट गए तो कला,संस्कृति और परंपरा की चमचमाती इमारत कभी नहीं बन सकती। अतः युवा जगेगा तो संस्कृति भी अपनी बुलंदियों को छुवेगा। आज रामगढ़ के आयोजन से कल बृहद झारखंड के कोने-कोने में हमारी ऐसे आयोजन होना है जिससे हमारी सांस्कृतिक विरासत को पूरी दुनिया परिचित हो सके।”
अनिकेत ओहदार ने कहा “मैं झारखंड के अलावे ओडिशा और बंगाल के भी भाइयों को आभार व्यक्त करना चाहूंगा जिन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन को भव्य बनाने में अपना सहयोग दिया। भविष्य में बृहद झारखंड के ऐसे और भी परब त्योहार को इससे भी भव्यतम रूप में मनाया जाएगा जिसको देश-दुनिया देखेगी। झारखंड की कला संस्कृति को देखने गुनने के लिए लोग देश विदेश से आएंगे।”
“पनेश्वर कुमार ने कहा कि आज सोहराई जतरा है,कल आखाइन जतरा से देश-दुनिया परिचित होगी.. और इस प्रकार से हर झारखंडी परब त्योहार और संस्कृति अपनी छाप छोड़ेगा क्योंकि युवा अब यहीं रुकने वाले नहीं है।”
आनंद केटीआर ने कहा की “सुसुप्तावस्था में जा रही झारखंडी संस्कृति अब पुनः अंगड़ाई लेना शुरू कर दी है, और अब का युवा इसे शीर्ष पे पहुँचा के ही दम लेगा।”
रवि कुमार महतो ने कहा की सोहराय तो महज बस एक सौपान है, हमें तो बारह मासे तेरह परब के सम्पूर्ण सीढ़ी से विश्व को परिचित कराना है!
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में ओम प्रकाश महतो, द्वारिका प्रसाद,अनिकेत ओहदार,संतोष महतो टिड्डआर, संतोष बंसीरआर, जगेश्वर महतो नागवंशी, पनेश्वर कुमार,आनंद केटिआर, रवि महतो,महेश निगम, संतोष महतो,बिहारी महतो,दामोदर महतो,पवन कुमार महतो, हेमलाल महतो,रमेश महतो,अर्चना महतो,कौलेश्वर महतो, देवानंद महतो,धनंजय महतो, मुनीनाथ महतो का योगदान रहा।