
आइए कुष्ठ रोग से लड़ें और कुष्ठ को इतिहास बनाएं, इसी थीम के साथ वर्ष 2023 में कुष्ठ के विरुद्ध अभियान चलाया जाएगा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि एवं राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन दिवस के मौके पर कुष्ठ उन्मूलन पखवाड़ा की शुरुआत होगी। ये बातें स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख डॉ कृष्ण कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि कुष्ठमुक्त समाज की स्थापना के संकल्प के साथ पहले दिन सभी जिलों में उपायुक्त अपने कर्मियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ संदेश देंगे। इसके बाद ग्राम सभा के माध्यम से आमजनों तक कुष्ठ मुक्त संदेश पहुंचाया जाएगा।
नामकुम स्थित आरसीएच सभागार में आयोजित मीडिया कॉर्डिनेशन कमिटी की बैठक में दूरदर्शन से अमन झा, आईईसी कोषांग से मीडिया कंसल्टेंट अजय शर्मा, राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के कंसल्टेंट रंजीत रंजन पाठक, डब्ल्यूएचओ के कॉर्डिनेटर डॉ अभिषेक, मनोज, ए पर्सन अफेक्टेड फ्रॉम लेप्रोसी (अपाल) के अध्यक्ष मो जैमुद्दीन समेत अन्य मौजूद थे।
शीघ्र इलाज अपंगता से बचाव
निदेशक प्रमुख ने कहा कि कुष्ठ रोग का इलाज संभव है। इसकी दवा सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क उपलब्ध है। यदि किसी की त्वचा में हल्के रंग का दाग है तो तुरंत जांच कराएं। उन्होंने कहा कि कुष्ठ न तो भगवान का अभिशाप है और न ही फैलने वाली बीमारी है। यह न तो छूआछूत की बीमारी है और न ही पूर्वजन्मों का पाप। शीघ्र इलाज से अपंगता से बचा सकता है। उन्होंन कहा कि जिले के बाद यह कार्यक्रम प्रखंड स्तर पर होगा। फिर ग्राम सभा के माध्यम से गांव-गांव तक यह संदेश पहुंचाया जाएगा। ग्राम सभा में कुष्ठमुक्त हुए मरीज आमजनों को जानकारी देंगे।