आरएसएस की भाषा बोल रही आशा लकड़ा, गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं : सरना धर्म रक्षा अभियान

RANCHI :

राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान ने मेयर और भाजपा नेत्री आशा लकड़ा के उस बयान की निंदा की है जिसमें उन्होंने सरना धर्म कोड की मांग को खारिज किया है. आशा लकड़ा ने बीते दिनों बयान दिया था कि चूंकि सरना, पूजा स्थल को कहा जाता है इसलिए पूजास्थल के नाम पर अलग धर्मकोड नहीं दिया  जा सकता.

आरएसएस की भाषा बोल रही आशा लकड़ा, गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं : सरना धर्म रक्षा अभियान

रांची में धर्मगुरू बंधन तिग्गा की अध्यक्षता में सरना धर्म रक्षा अभियान हुई बैठक में कहा गया कि आशा लकड़ा का बयान दिग्भ्रमित करने वाला है. बैठक में कहा गया कि आशा लकड़ा को मालूम होना चाहिए कि 11 नवम्बर 2020 को विधानसभा से पारित हुआ है और भाजपा के विधानसभा सदस्यों ने भी अपना समर्थन दिया है. सर्वसम्मति से सरना धर्म कोड पारित हुआ है.

 जैन धर्मावलंबियों से अधिक है सरना मानने वालों की संख्या

श्रीमती लकड़ा को यह जानकारी होनी चाहिए कि 2011 की जनगणना में अन्य धर्म कॉलम में देश भर से 79 लाख लोगों ने अपना अपना धर्म दर्ज किया है, जिनमें देश भर से 49.57 लाख लोगों ने अपना धर्म सरना दर्ज किया है जो जैन धर्म से कहीं अधिक है.

 श्रीमती लकड़ा को यह भी मालूम होना चाहिए कि झारखंड में 2011 की जनगणना में अन्य धर्म कॉलम में 42 लाख 35 हजार लोगों ने अन्य धर्म कॉलम में अपना अपना धर्म दर्ज किया जिसमें से 41 लाख 31 हजार लोगों ने अपना धर्म सरना धर्म दर्ज किया है जिसमें पूरा मुंडा हो संथाल और झारखंड के लगभग सभी जनजाति समुदाय ने दर्ज किया है. यह संख्या 97% है. उड़ीसा में 2000 की जनगणना में सरना धर्म दर्ज करने वालों की संख्या 4 लाख 33 हजार और पश्चिम बंगाल 4 लाख 32 हजार  है.

 सरना धर्म का देश के 21 राज्यों में प्रभावी ढंग से प्रसार हुआ है. इसे मात्र छोटानागपुर का कहना, भ्रम पैदा करना है. सभा में यह भी कहा गया कि आशा लकड़ा की बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि वह आरएसएस की भाषा बोल रही है.

अनुबंधकर्मियों की सेवा नियमित करने का होगा विरोध

बैठक में यह भी कहा गया कि विभिन्न सरकारी विभागों, अनुमंडलों, जिला, प्रखंडो स्तर पर नियुक्त हजारों अनुबंध कर्मियों की सेवा नियमित की जा रही है इसका अभियान के विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठन राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा, केंद्रीय सरना समिति, झारखंड आदिवासी संयुक्त मोर्चा, राष्ट्रीय आदिवासी छात्र संघ, सरना धर्म सोतो: समिति खूंटी, केंद्रीय सरना संघर्ष समिति रांची सहित अन्य संगठनों ने विरोध किया है.

 कहा गया कि संविदा नियुक्ति में एसटी, एससी के आरक्षण का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन हुआ है. बैठक में यह भी प्रस्ताव लिया गया की वर्तमान गठबंधन की सरकार के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन से निवेदन किया गया है कि इस तरह की भयंकर गलती कभी ना करें अन्यथा राज्य में आदिवासियों का आंदोलन होगा.

ये थे उपस्थित

  बैठक में डॉ करमा उरांव, बलकू उरांव, संगम उरांव, रवि तिग्गा, नारायण उरांव, अमर उरांव, शिवा कच्छप, प्रभात तिर्की, रेणु तिर्की, रायमुनि किस्पोट्टा सहित अन्य उपस्थित थे.

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