RANCHI :
दुनिया के इस दुर्गम इलाके में धावकों को दौड़ना था जहां पर भारत और चीन की फौजें तैनात है. दरअसल, यह मैराथन कई मायनों में अनोखी थी. यह पैंगोंग की जमी हुई बर्फीली झील पर हुई थी. धावकों को करीबन 15 ईंच मोटी बर्फ के उपर दौड़ना था. विश्व में पहले भी जमी हुई झीलों पर मैराथन हो चुका है पर कोई भी मैराथन इस ऊंचाई (13862 फुट) पर नहीं हुई थी. अभी पैंगोंग में जितनी बर्फ जमी है उतनी निकट भविष्य में नहीं जमेगी. इसलिए इसे द लास्ट रन नाम दिया गया. एक तरह से इस मैराथन के जरिए विश्व समुदाय को पर्यावरण के संभावित बदलाव और इसके नतीजे को लेकर आगाह भी किया गया है.

बर्फीले पैंगोंग झील पर मैराथन, माइनस 20 डिग्री के तापमान में दौड़े धावक
दुनिया की सबसे ऊंची पैंगोंग झील में हाफ मैराथन सोमवार को संपन्न हो गई. समुद्र तल से करीब 13,862 फुट की ऊंचाई पर हुई मैराथन को गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रेकार्डस में स्थान मिला. इस मैराथन में कुल 75 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिसमें चार विदेशी नागरिक (अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन) के भी थे.
लेह लद्दाख के स्थानीय प्रशासकों के द्वारा हुआ आयोजन
मैराथन का आयोजन एडवेंचर स्पोर्टर्स फाउंडेशन लद्दाख, लेह स्वायत पहाड़ी विकास परिषद, लद्दाख पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से किया गया था. धावकों को दौड़ पैंगोंग के लुकूंग से मन नामक जगह के बीच करीब 21 किलोमीटर की दूरी तय करनी थी. जिसमें धावकों को तीन से साढ़े तीन घंटे का समय लगा.
फिनिश लाइन पर पहुंचते ही धावकों को गिनीज बुक की ओर से प्रशस्ति पत्र दिए गए.
मौके पर लेह के जिला उपायुक्त श्रीकांत बाला साहेब सुसे और लेह परिषद के अध्यक्ष ताशी ग्यालान ने कहा कि यह लद्दाख के लिए ऐतिहासिक घड़ी है.
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और कार्बन न्यूट्रल लद्दाख का संदेश देने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा.
हर 5 किलोमीटर पर एनर्जी स्टेशन
अत्यधिक ऊंचाई पर आयोजित इस मैराथन को विश्व के सबसं कठिन मैराथन की कैटेगरी में रखा जा सकता है. दरअसल इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी की वजह से दौड़ना काफी मुश्किल होता है. इसके लिए हर 5 किलोमीटर पर प्रतिभागियों के लिए एनर्जी स्टेशन स्थापित किया गया था. एंबुलेंस और गर्म पानी की भी व्यवस्था की गई थी.
पैंगोंग झील पर पर तैनात है भारत और चीन की फौज
पैंगोंग झील पर भारत और चीन के बीच सीमा विवाद भी है. इस झील के अलग अलग छोरों पर दोनों देशों की फौजे तैयार हैं. इस झील के कई इलाकों पर दोनों ही देशों के दावे हैं और इसको लेकर कई बार झड़प की स्थिति भी बनी है.