
झारखंड के महादेव टोप्पो, असिंता असुर सहित अन्य कवि भी समारोह मे कर रहे हैं शिरकत
रांची.
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में चल रहे साहित्य महोत्सव उन्मेष में झारखंड के साहित्कारों ने भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। पहली बार देश के साथ साथ दुनिया के साहित्यकारों के बीच झारखंड कवि, साहित्यकार अपनी रचनाएं पेश कर रहे हैं। 6 अगस्त तक चलनेवाले इस समारोह में देश-विदेश के जिन 375 साहित्यकारों, कवियों, लेखकों का जमावड़ा है, उनमें, झारखंड के महादेव टोप्पो, असुर समुदाय की असिंता असुर जैसे नाम भी शामिल हैं।
साहित्यकार महादेव टोप्पो से टेलीफोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि भोपाल में भी मानसून की बारिश की झड़ी लगी हुई है। यहां देश-विदेश के साहित्य जगत के लोगों के साथ महोत्सव में शिरकत करना सुखद अनुभव है।
उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि यह एक बड़ा आयोजन है। इसमें देश के अलावा एशिया, यूरोप और अफ्रीका से भी 103 भाषाओं के साहित्यकार और विद्वान जुटे हैं। उन्होंने कहा कि छह अगस्त को मुझे एक सत्र की अध्यक्षता करनी है। इस कार्यक्रम में अलग अलग प्रांतों के लोगों से जो बातचीत हो रही है, उससे कई अलग अलग दृष्टिकोणों को जानने समझने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि आधुनिक काल में आदिवासियों ने दुनिया को ज्यादा मानवीय दृष्टिकोण को समझने का मौका दिया है। जंगल, जल और जमीन को बचाने की उनकी मुहिम दरअसल पूरे विश्व के संदर्भ में है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महोत्सव का उद्घाटन किया था। उन्होंने अपने संबोधन में भारत की विश्वदृष्टि के बारे में बात की थी. साथ ही झारखंड के संताल साहित्य व भाषा पर भी बाते रखीं। उन्होंने कहा कि भारत में 700 आदिवासी समुदाय हैं लेकिन उनकी भाषाएं और बोलियां इससे कहीं अधिक है। भाषाओं को बचाकर रखना लेखकों का कर्तव्य हैं. यह हम सभी का दायित्व भी है। उद्घाटन समारोह में मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित हुए थे।