सीएजी की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, कहा गया कि नदी शहरी क्षेत्र में किसी भी काम की नहीं बन पाई, सिवरेज ड्रेनेज का काम 17 वर्षों के बाद भी अधूरा

रांची.
रांची की लाइफलाइन कही जानेवाली हरमू नदी के जीर्णोद्धार एवं संरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने 92 करोड़ से ज्यादा खर्च किए थे। पर सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इतनी राशि खर्च होने के बाद भी प्रोजेक्ट अपने उद्देश्यों को पूरा करने में नाकाम रहा। हरमू नदी का पानी जितना पहले प्रदूषित था जीर्णोद्धार के बाद भी इसका पानी प्रदूषित ही है और यह नदी शहर के लिए किसी काम की नहीं है।
वहीं एक अन्य रिपोर्ट से पता चलता है कि 17 वर्षों के बाद भी रांची शहर में जल मल निकासी के लिए सिवरेज ड्रेनेज का काम पूरा नहीं हो पाया। इसमें भी सरकार के करोडों रुपए पानी में बह गए गए।
हरमू नदी के जीर्णोद्धार के काम में शुरू से ही नियमों की अनदेखी हुई
गौरतलब है कि अखबारों में हरमू नदी के सौंदर्यीकरण में हो रही अनियमितता के बारे में लगातार कई रिपोर्ट मीडिया में आई थी जिसके बाद इस मामले की जांच शुरू की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आईआईटी मुंबई की सलाह के बाद भी राज्य सरकार ने परियोजना की योजना राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) के दिशा निर्देशों (जैसे, शहर स्वच्छता योजना की तैयारी) सीवरेज उत्पादन की मात्रा आदि) के तहत निर्धारित प्रकियाओं के तहत नहीं बनाई थी। जिसकी वजह से इस कार्य के लिए केंद्र सरकार से मिलनेवाली 55.03 करोड़ रुपए राज्य को नहीं मिल पाई।
राज्य सरकार ने नदी के जीर्णोद्धार के लिए नदी के शहरी खंड का काम 92.78 करोड़ रुपए की लागत से कराया।
परियोजना के उद्देश्य था कि नदी का प्रदूषण कम करते हुए उसे स्वच्छ जल के साथ एक जीवंत जल संपत्ति के रूप में बनाया जाए। जून 2014 से लेकर मार्च 2022 तक की अवधि के दौरान विभाग तथा झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्क्चर डेवलपमेंट कंपनी जुडको के अभिलेखों की जांच से पता चलता है कि नदी को जीवंत जल संपत्ति के रूप में विकसित करने के उद्देश्यों को पूरा नहीं किया जा सका।
नदी के पानी के प्रदूषण की जांच मेकन से कराने के बाद पता चला कि नदी में अन्य प्रदूषण के साथ मल की उपस्थिति भी है। कुल मिलाकर परियोजना के द्वारा नदी के प्रदूषण के स्तर को कम करने कालक्ष्य पूरा नहीं किया जा सका है। नदी में सीवरेज का पानी पाया गया है। यहां तक की नदी के किनारे बने घरों से भी प्रदूषित पानी को नदी में बहने को नियंत्रित नहीं किया जा सका है।
ड्रेनेज सिवरेज मामला, रांची में 17 साल पहले शुरू हुई योजना भी अधूरी
रिपोर्ट से पता चला है कि शहर में मल जल निकास व्यवस्था 17 से भी अधिक सालों में पूरी नहीं पाई। सबसे पहले जून 2005 में इस योजना पर काम शुरू किया गया था जिसे अगस्त 2022 में भी पूरा नहीं किया जा सका था। परियोजना को पूरा करने की समय सीमा सितंबर 2017 से मार्च 2019 तक किया गया फिर अब इसकी सीमा को बढ़ाकर जनवरी 2023 किया गया है जिससे परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य विफल हो गया।
इस परियोजना के लिए संबंधित विभाग द्वारा निविदा की शर्तों का उल्लंघन कर एक अनुभवहीन एवं अपात्र संवेदक को काम दिया गया। इससे परियोजना की मुश्किलें बढ़ गई।
इस मामले में डीपीआर तैयार करने के लिए खर्च की गई 16.04 करोड़ की राशि बेकार हो गई। परियोजना के लिए रांची नगर निगम ने संवेदक के रूप में (मेसर्स) विभोर वैभव प्राइवेट लिमिटेड को चुना गया था पर संव्दक के पास निविदा के लिए आवश्यक अनुभव और वित्तीय क्षमता नहीं थी।
कार्य के लिए संवेदक कार्य स्थल पर जरूरी जनशक्ति और मशीनरी उपलब्ध कराने में विफल रहा था। दो बार परियोजना में विस्तार दिए जाने के बाद भी एकपक्षीय रूप से काम बंद कर दिया गया। उइसकी वजह से अक्तूबर 2019 में अनुबंध समाप्त कर दिया गया.