गोल्डन आवर में पहुंच गए हॉस्पिटल तो जोड़ा जा सकता है कटे अंगों को

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RANCHI : पारस एचईसी अस्पताल रांची प्लास्टिक सर्जरी तहत माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के साथ नए आयाम गढ़ रहा है। फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ नितेश कुमार ने बताया कि हम पिछले एक साल से माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी के माध्यम से लोगों की सर्जरी कर रही है। डॉ विवेक गोस्वामी के नेतृत्व में यह कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि गोल्डन आवर में मरीज कटे हुए अंगों के साथ आ जाए तो हम उसे जोड़ने का प्रयास करते है। वहीं 90 परसेंट तक मरीज के अंगों की रिकवरी हो सकती है। अब हम इसे पारस में रिलांच कर रहे है। जिससे कि 24 घंटे 7 दिन यह सुविधा लोगों को मिलेगी। साथ ही बताया कि आज पारस हॉस्पिटल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्शन किया जा रहा हैं। इसमे रीइम्प्लांटेशन सर्जरी, माइक्रोवैस्कुलर फ्री फ्लैप सर्जरी, ब्रैकियल प्लेक्सस सर्जरी, रिवैस्कुलराइजेशन सर्जरी, सिर और गर्दन की रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी, लसीका सर्जरी, पुनः प्रत्यारोपण सर्जरी की जा रही है। इसके अलावा शरीर से कटे हिस्सों को पूर्ण तरीके से दोबारा जोड़ने का काम भी किया जा रहा है।

गोल्डन पीरियड मरीज के लिए अहम

डॉ विवेक ने बताया कि एक्सीडेंट के बाद मरीज गोल्डन पीरियड में हॉस्पिटल पहुंच जाता है तो कटे हुए अंगों को पूरी तरह से जोड़ने की संभावना बढ़ जाती है। जिसमें पुरानी नसों को हड्डी और मांसपेशियों से जोड़ा जाता है। यह ऑपरेशन आमतौर पर लंबे समय तक चलता है। उन्होंने बताया कि यदि किसी दुर्घटना के कारण जोड़ का कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया हो, तो जोड़ के किसी अन्य हिस्से से मांसपेशियों और अन्य हड्डियों को निकालकर नस के माध्यम से जोड़ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि शरीर के किसी हिस्से की बड़ी रक्त वाहिका कट जाती है तो उसे वापस जोड़ने के लिए रिवास्कुलराइजेशन सर्जरी की जाती है। इसमें किसी अन्य नस या डैक्रॉन ग्राफ्ट का उपयोग करके नस का रिकंस्ट्रक्शन किया जाता है। इसके अलावा माइक्रोवैस्कुलर विधि के माध्यम से फाइलेरिया रोग या हाथी पांव का इलाज करने की सुविधा अब रांची पारस अस्पताल में उपलब्ध है।

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