ग्रेड मेथड फॉर क्लीनिकल गाइडलाइन से बीमारियों के इलाज में मिलेगा फायदा

रिम्स में 16 से 18 दिसंबर तक ग्रेड मेथड फॉर क्लीनिकल गाइडलाइन डेवलपमेंट पर वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है। रिम्स निदेशक प्रो डॉ कामेश्वर प्रसाद के साथ मुख्य वक्ता मैकमास्टर यूनिवर्सिटी कनाडा के डॉ गॉर्डन गयट व डॉ ब्रेम रोच्वर्ग शामिल हुए। डॉ कामेश्वर प्रसाद ने कहा कि भारत में उच्चस्तरीय क्लीनिकल गाइडलाइन के लिए ग्रेड नेटवर्क (GRADE: Grading of Recommendations, Assessment, Development and Evaluation) नहीं है। ग्रेड नेटवर्क विकसित होने से डॉक्टर बीमारियों के निजात के लिए साक्ष्य पर आधारित दिशानिर्देश तैयार कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि इस नेटवर्क का उपयोग कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा किया जा रहा है।

कोविड में बचाई लोगों की जान

डॉ गॉर्डन गयट ने बताया की ग्रेड नेटवर्क कई देश जैसे अमेरिका, कनाडा, स्पेन, चीन, ब्राज़ील में है। उन्होंने कहा कि दिशानिर्देशों के अभाव में डॉक्टरों को बीमारियों के सटीक इलाज में कठिनाई आती है। साक्ष्य पर आधारित दिशा निर्देश होने से मरीज़ो का सही से इलाज हो पायेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस पद्धति का उपयोग करके विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 महामारी के दौरान कुछ बेहतरीन दिशा-निर्देश बनाए हैं और लाखों लोगों की जान बचाई है। 

शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे

डॉ ब्रेम रोच्वर्ग ने कहा कि इस वर्कशॉप का उद्देश्य दिशानिर्देश तैयार करने में विशेषज्ञों, अन्य डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को ट्रेनिंग प्रदान करना है। जिससे कि भविष्य में न सिर्फ गाइडलाइन तैयार करने में मदद करेंगे बल्कि अन्य शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे। भारत में कुछ ही लोग हैं जो साक्ष्य आधारित सबसे उपयुक्त दिशानिर्देश विकसित करने के लिए ग्रेड पद्धति में प्रशिक्षित हैं। इस वर्कशॉप में झारखण्ड सहित पूरे भारत के डॉक्टर लाभान्वित हो रहे हैं। झारखंड के सभी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों सहित एम्स दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ व अन्य राज्यों के 100 प्रतिभागी भाग ले रहे है। वहीं 12 प्रतिभागी ऑनलाइन माध्यम से इस वर्कशॉप में जुड़े है।

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