रिम्स में जल्द शुरू होगा आर्गन ट्रांसप्लांट 

राज्य के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल रिम्स में जल्द ही आर्गन ट्रांसप्लांट शुरू होगा. जिससे कि राज्य के लोगों को आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. ये बातें अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अरुण कुमार सिंह ने कही. उन्होंने कहा कि सभी तरह के ट्रांसप्लांट की सुविधा रिम्स में मिलेगी.

साथ ही सभी संबंधित अधिकारियो को निर्देश दिया गया कि अन्य हॉस्पिटल्स में भी ऑर्गन ट्रांसप्लांट को लेकर क्या विकल्प हो सकता है. जिससे कि एक्सीडेंटल कैसे में किसी को नया जीवन मिल सकेगा. बताते चलें कि सोमवार को नेपाल हाउस में हेल्थ केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से रोड मैप टू ट्रांसफार्म द ऑर्गन डोनेशन सिस्टम पर वर्कशॉप का आयोजन किया गया था.

11 ने डोनेशन की जताई इच्छा

आर्गन डोनेशन को लेकर लगातार अवेयर किया जा रहा है. जगह-जगह पर कैंप भी लगाए जा रहे है. फिर भी रिम्स में मात्र 11 लोगों ने आर्गन डोनेशन की इच्छा जताई है. इसमें 8 लोगों ने अपने सभी ऑर्गन डोनेशन करने की इच्छा जताई है, जबकि 1 डोनर लंग्स और किडनी डोनेट करेगा. वहीं 1 डोनर लंग्स, किडनी, हार्ट, पैंक्रियाज और लीवर दान करेगा. इसके अलावा 1 डोनर किडनी डोनेट करेगा.

रिम्स 12वां आर्गन ट्रांसप्लांट सेंटर

रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट, लीवर, पैनक्रियाज व अन्य आर्गन के ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने की तैयारी है. रिम्स का ऑर्गन ट्रांसप्लांट सेंटर देश का 12वां सेंटर होगा, जहां लोग आनलाइन आवेदन कर सकेंगे. इच्छुक लोग रिम्स की वेबसाइट पर जाकर ऑर्गन डोनेशन के लिए आवेदन भी कर रहे हैं. इसके लिए सरकार से अनुमति रिम्स को मिल चुकी है. वहीं आर्गन डोनेशन के लिए लोगों को अवेयर भी किया जा रहा है. 

मां की बॉडी कर दी डोनेट

रिम्स सुपरिटेंडेंट डॉ विवेक कश्यप ने अपनी मां भानु गुप्ता की मौत के बाद उनकी बॉडी मेडिकल स्टूडेंट्स की पढ़ाई के लिए रिम्स को दान कर दी. उन्होंने कहा था कि उनके पिताजी स्व डॉ बीएन गुप्ता की भी इच्छा थी कि उनकी बॉडी डोनेट कर दी जाए. उनके पिता ने भी कहा था कि मेरी मौत के बाद मेरा शरीर मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए दान कर देना. मृत शरीर को जला देने से उसका कोई उपयोग नहीं हो पाता.

अन्य राज्यों से झारखंड काफी पीछे

लोकसभा के बजट सत्र (फरवरी 2022) के दौरान सांसदों ने केंद्र सरकार से आर्गन ट्रांसप्लांट की संख्या और इसके पिछले तीन सालों के रिकॉर्ड के अलावा अन्य जानकारियों की मांग की थी. इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि पिछले तीन सालों (2019-2021) में आर्गन ट्रांसप्लांट के सबसे अधिक केस दिल्ली में (4950) रिकॉर्ड हुए. इसके अलावे तमिलनाडु (4156) और महाराष्ट्र (3180) जैसे राज्य हैं. केरल (2479), तेलंगाना (2329), पश्चिम बंगाल (1957) जैसे राज्य भी इस लिस्ट में दूसरे राज्यों से कहीं आगे हैं. इनकी तुलना में हिमाचल प्रदेश (5), उत्तराखंड (7), मणिपुर-गोवा (17-17), झारखंड में (64) केस दर्ज किए गए. जिससे समझा जा सकता है कि यहां पर आर्गन ट्रांसप्लांट को लेकर क्या स्थिति है.

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