लेम गांव में प्रार्थना सभा के सदस्यों को ग्रामीणों ने खदेड़ा

सदर थाना अंतर्गत लेम गांव में प्रार्थना सभा के द्वारा किए जा रहे प्रचार का ग्रामीणों ने विरोध किया है. दरअसल रविवार को जमीन से संबंधित मामलों को लेकर गांव के अखड़ा में बैठक बुलाई गई थी लेकिन वहां पर सरना प्रार्थना सभा का प्रचार प्रसार किया जा रहा था. सरना प्रार्थना सभा के सदस्य नई विधि से प्रार्थना के तौर तरीकों के बारे में बता रहे थें जिसका लेम गांव के सरना समिति के सदस्यों ने विरोध किया.

लेम गांव में प्रार्थना सभा के सदस्यों को ग्रामीणों ने खदेड़ा

लेम सरना समिति के अध्यक्ष विनय उरांव ने बताया कि हिंदपीढ़ी निवासी रोहन कुजूर दिग्भ्रमित कर गांव के अखड़ा में बुलाया था. विनय उरांव के मुताबिक जब गांव के लोगों ने रोहन कुजूर से पूछा कि प्रार्थना सभा कब से शुरू हुआ है तो वे ग्रामीणों से उलझ गए और हाथापाई करने लगे.

धर्मगुरू, धर्मबहन का कोई स्थान नहीं

ग्रामीणों ने कहा कि लेम गांव में पाहन के द्वारा रूढ़ीवादी परंपरा संस्कृति के आधार पर पूजा पाठ किया जाता है और यहां प्रार्थना सभा नहीं चलता है. विनय ने बताया कि सरना धर्म में धर्मगुरू, धर्मभाई धर्मबहन का कोई स्थान नहीं है. इसके बाद ग्रामीणों ने सरना प्रार्थना सभा के सदस्यों को खदेड़ दिया.

विनय उरांव ने कहा कि गांव में पूर्वजों से रूढ़ीवादी परंपरा संस्कृति चलती आ रही है पर प्रार्थना सभा के द्वारा बार बार गांव में आकर पुरानी परंपरा त्यागने की बात कही जाती है.  उन्होंने कहा कि प्रार्थना सभा ईसाई मिशनरियों से मिलता जुलता है. प्रार्थना सभा मिशनरियों का पार्ट टू है. गांव के लोग अब जागरूक हो चुके हैं  इसलिए प्रार्थना सभा का विरोध कर मूल संस्कृति को बचाने का प्रयास किया जा रहा है.

आज की बैठक में लेम सरना समिति के संजय उरांव, अशोक टोप्पो, अनिल टोप्पो, भगवानदास पाहन सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे.