1 लाख 11 हजार करोड़ से ज्यादा के बजट पेश होने की उम्मीद, नियोजन और स्थानीय नीति ला सकती है सरकार

वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट सत्र 27 फरवरी से शुरू हो रहा है. पिछले वित्तीय वर्ष 2022-23 की तुलना में इस बार(2023-24) ज्यादा राशि का प्रावधान बजट में होने की उम्मीद है. पिछली दफा 1.01 लाख करोड़ का बजट पेश किया गया था. इस बार उम्मीद जतायी जा रही है कि 1 लाख 11 हजार करोड़ से ज्यादा का बजट आ सकता है. बतौर वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव चौथी बार बजट पेश करेंगे. इससे पहले लगातार पांच बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड पूर्व सीएम सह वित्त मंत्री रघुवर दास के नाम था. आनेवाले बजट को लेकर लोगों की निगाहें सरकार पर है. लोग उम्मीद लगाये बैठे हैं कि बढ़ती महंगाई और चुनौतियों के बीच सरकार जनाकांक्षा के अनुरूप बजट लायेगी. पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में आने वाले बजट में क्या खास होगा, यह सबके लिये उत्सुकता का विषय बना हुआ है. ऐसे में सबकी नजरें 3 मार्च को विधानसभा पटल पर पेश होने वाले बजट पर लग गयी है.
हमीन कर बजट से जनता से कनेक्शन जोड़ने की है कोशिश
राज्य सरकार ने इस वर्ष के बजट की तैयारी से पहले और लोगों के सेंटीमेंट से जोड़ने को बजट का नामकरण ‘हमीन कर बजट’ किया था. विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य की तीन चौथाई आबादी खेती-किसानी पर आश्रित है. इसे ध्यान में रखते हुए और हमीन कर बजट पर मिले सुझाव के मुताबिक इस सेक्टर पर ज्यादा फोकस दिखा सकती है. साथ ही वित्तीय मामलों के एक्सपर्ट के अनुसार एक बैलेंस बजट तभी बन सकता है जब ढांचागत विकास पर बजट का आधा हिस्सा खर्च हो. शेष 50 प्रतिशत हिस्से में 30 प्रतिशत राज्य की जरूरतों और 20 प्रतिशत को अन्य देनदारियों में खर्च करना चाहिए.
सत्र को लेकर सरकार की तैयारी
बजट सत्र को लेकर सत्तारूढ़ महागठबंधन के नेताओं की आज बैठक बुलायी गयी है. बैठक शाम चार बजे मुख्यमंत्री आवास में होगी. इसमें कांग्रेस, झामुमो और राजद के मंत्रियों के अलावा विधायक और अन्य प्रमुख नेता भी शामिल होंगे. बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे. बजट पेश करने की तैयारियों के अलावा सदन में विपक्षी दलों के सवालों और रणनीतियों की तोड़ निकालने पर भी मंथन होगा.
जानकारी के मुताबिक यह बजट सत्र सरकार के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित होने वाला है. सरकार के स्तर से कहा गया था कि बजट सत्र की अवधि में नयी नियोजन नीति लायी जायेगी. पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण होगा. उसके बाद बजट सत्र में सरकार नियोजन नीति पर विधेयक ला सकती है. इसके अलावा स्थानीयता को लेकर भी फिर से सदन मे विधेयक लाया जा सकता है.