
प्रवीण मुंडा
रांची :
द्वितीय विश्व युद्ध का समय था. युद्ध की शुरूआत में नाजी जर्मनी की हमलावर सेनाएं काफी आक्रामक थी वे पहले पौलेंड और फिर रूस में घुस आई. रूस के एक शहर सेंट पीट्सबर्ग के पास स्थित कैथरीन पैलेस में कलाकृतियों की देखरेख करनेवाला क्यूरेटर के पास इतना समय नहीं था कि पूरे पैलेस (महल) की बहूमूल्य वस्तुओं को हटा पाता. तो उसने उस पैलेस के एक सबसे महत्वपूर्ण कक्ष, जो करीब 55 वर्ग मीटर एरिया में था, को वाल पेपर से ढकवा दिया और खुद वहां से निकल गया. नाजियों को कैथरीन पैलेस पर कब्जा करने में जरा भी दिक्कत नहीं आई. जल्दी ही नाजियों को कैथरीन पैलेस के वाल पेपर से ढंके हुए उस कक्ष के बारे में पता चल गया और बताया जाता है कि महज 36 घंटे में उन्होंने उस कक्ष की बहूमूल्य कलाकृतियों व आर्टिफेक्ट्स को चुरा लिया जिसे कहा जाता था एंबर रूम.
6 टन से अधिक एंबर, दुनिया का आठवां अजूबा था वह कक्ष
कैथरीन पैलेस के एंबर रूम को उस समय वैभव, खूबसूरती और भव्यता की वजह से दुनिया का आठवां आश्चर्य माना जाता था. उस कक्ष में सोने की पत्तियों, रत्नों और एंबर के पैनल लगे थे. कहा जाता है कि उस कक्ष की दीवारों में 6 टन से अधिक एंबर लगे थे और उसे बनाने में दस साल का समय लगा था. आज के समय में उस कक्ष में लगे एंबर, रत्नों और सोने की पत्तियों का अनुमानित मूल्य 500 मिलियन डॉलर से अधिक होता. सालों साल तक वह कक्ष रूसी शासकों के वैभव का प्रतीक बना रहा. यह दुर्भाग्य ही था कि जिस कक्ष को बनाने में दस साल का समय लगा था, नाजियों को उसे लूटने में महज 36 घंटे लगे.
क्या थी एंबर रूम की कहानी क्या नाजियों ने उसे लूटा जो कभी उनके ही देश का था
एंबर रूम की कहानी काफी दिलचस्प रही है. यह रूम दरअसल 1701 के आसपास प्रशिया के शासक फ्रेडरिक विलियम के चार्लोटन पैलेस में स्थापित किया जाना था. पर किसी कारण वश इसे बर्लिन (जर्मनी) के सिटी पैलेस में स्थापित किया गया. 1716 तक यह रूम बर्लिन में ही रहा. इसके बाद फ्रेडरिक ने इसे रूस के सम्राट जार पीटर द ग्रेट को बतौर उपहार दे दिया. तब रूम में लगे एंबर और सोने की कलाकृतियों को रूस के कैथरीन पैलेस में शिफ्ट किया गया. और जब द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हुआ तो फिर नाजी सेनाएं रूस, पोलैंड सहित यूरोप के कई देशों में घुस आई.
अब कहां है एंबर रूम का वह खजाना
नाजियों ने उस एंबर रूम से चुराये गए बेशकीमती आर्टिफैक्ट्स को चुराने के बाद कोनिंग्सबर्ग के किले में छुपा दिया. यह अक्तूबर 1941 की बात है. युद्ध के दौरान मित्र राष्ट्र के बमवर्षकों ने कोनिंग्सबर्ग के किले में भारी बमबारी की जिससे वह किला तबाह हो गया. इसके बाद चुराये गये एंबर का क्या हुआ यह कभी पता नहीं चला. कुछ लोग यह मानते हैं कि बमबारी से पहले ही नाजियों ने एंबर को जर्मनी शिफ्ट कर दिया था. कुछ लोगों का मानना है कि वह खजाना नाजियों द्वारा पोलैंड में बनाये गए 40 किलोमीटर से भी अधिक लंबी सुरंगों में कहीं दफन कर दिया गया था. सच क्या है यह किसी को नहीं पता पर शोधकर्ताओं की अलग अलग टीमें अभी भी उस एंबर को तलाशने में जुटी है. उम्मीद है कि किसी दिन वह खजाना एक बार फिर से दुनिया की नजरों के सामने आ जायेगा.

कैथरीन पैलेस में एंबर रूम की प्रतिकृति
युद्ध खत्म होने के बाद रूसियों ने कैथरीन पैलेस के उस लूटे हुए कक्ष की प्रतिकृति फिर से तैयार कर ली. उसका उद्घाटन रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन ने किया था. रूम एक बार फिर से अपनी चकाचौंध करनेवाली आभा बिखेर रहा है पर असली एंबर रूम जो अब सिर्फ इतिहास के पन्नों में दर्ज है की बात ही कुछ और थी.