1962, हकीकत और प्रिया राजवंश

1962, हकीकत और प्रिया राजवंश

प्रवीण मुंडा

रांची.

वर्ष 1962, फिल्म हकीकत और प्रिया राजवंश इनका आपस में क्या कोई संबंध हो सकता है? सीधे तौर पर कुछ नहीं पर एक दूसरे नजरिए से देखे तो इसका जवाब बहुत सीधा सा है. 1962 में चीन ने अचानक भारत पर हमला किया था. इस युद्ध में भारत को काफी नुक्सान हुआ था. यह हमला नेहरू की विदेश नीति और खुफिया असफलता की कहानी है. अभी तक चीन ने भारत के एक बड़े हिस्से पर अपना कब्जा करके रखा है.

बहरहाल, उसी हमले की पृष्ठभूमि पर फिल्म हकीकत बनी. इसे युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी भारत की पहली फिल्म कहा जा सकता है. यह फिल्म 1964 में बनी थी. इसके निर्देशक चेतन आनंद थे जो, देवआनंद के बड़े भाई थे. इस फिल्म को नेशनल फिल्म अवार्ड (सेकेंड बेस्ट फीचर फील्म) और बेस्ट आर्ट डायरेक्शन का फिल्मफेयर अवार्ड मिला.

इसके गाने अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों..को सुनने से आज भी आंखे नम होने लगती है. इस फिल्म में तब बलराज साहनी और धर्मेंद्र जैसे बड़े और नामचीन सितारों ने काम किया था. पर यहां मैं बात कर रहा हूं इसी फिल्म में एक छोटी सी भूमिका में सबका ध्यान खींचनेवाली एक्ट्रेस प्रिया राजवंश की. प्रिया ने फिल्म में आंग्मो नामक एक लद्दाखी लड़की की भूमिका निभायी थी. चंचल, शोख और ऐसी खूबसूरती जिसे सजने के लिए शायद मेकअप की जरूरत न पड़े.

 प्रिया राजवंश 30 दिसंबर 1936 को शिमला में जन्मी थी. अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह कुछ समय के लिए लंदन चली गयी. वहां किसी कार्यक्रम के दौरान उसकी खींची गयी तस्वीर बंबई(अब मुंबई)  फिल्म उद्योग से जुड़े ठाकुर रणबीर सिंह को मिली. ठाकुर रणबीर के जरिये प्रिया, निर्देशक चेतन आनंद से मिली. चेतन ने प्रिया को अपनी फिल्म हकीकत में एक छोटा सा रोल दे दिया. और बतौर एक्ट्रेस प्रिया की गाड़ी चल निकली.

1962, हकीकत और प्रिया राजवंश

चेतन आनंद की शादीशुदा जिंदगी खराब चल रही थी और वे अपनी पत्नी से अलग हो चुके थे. उस दौर में उनकी और प्रिया की अंतरंगता बढ़ती चली गयी. प्रिया ने फिर हीर रांझा (1970), हंसते जख्म (1973), साहेब बहादुर (1977), कुदरत (1981), हाथों की लकीरें (1986) सहित कई और फिल्मों में काम किया. इधर चेतन आनंद और प्रिया राजवंश के रिश्ते भी साथ-साथ चलते रहे. दोनों साथ रहते थे पर शादी नहीं की. चेतन आनंद की मौत 1997 में हुई थी पर अपनी मौत से पहले उन्होंने अपनी संपत्ति का एक हिस्सा प्रिया राजवंश के नाम कर दिया था. यह बात चेतन आनंद की पहली पत्नी से हुए दो बेटों केतन आनंद और विवेक आनंद को नागवार गुजरी. प्रिया उनकी सौतेली मां की तरह थी और संपत्ति में हिस्सेदारी के बाद तो वह उकी आंखों में बुरी तरह खटकने लगी.

 27 मार्च 2000 को मुंबई के जुहू स्थित चेतन आनंद के रुइया पार्क बंगले में प्रिया राजवंश (वह उसी बंगले में रहती थी) की हत्या कर दी गयी. इस हत्या के आरोप में केतन आनंद और  विवेक आनंद सहित उनके दो नौकरों को आरोपी बनाया गया. अदालत ने चारों को उम्रकैद की सजा दी. चारों ने इस सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने चारों की अपील को स्वीकार कर ली. इसके बाद क्या हुआ इस संबंध में अधिक विवरण उपलब्ध नहीं है. बहरहाल, एक खूबसूरत और प्रतिभाशाली एक्ट्रेस का ऐसा दुखद अंत हुआ जो नहीं होना चाहिए था.

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