
रांची.
राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा रांची महानगर शाखा समिति के नेतृत्व में हरमू मैदान से अरगोड़ा चौक तक पैदल मार्च का आयोजन किया गया. यह मार्च राज्य एवं देश के विभिन्न हिस्सों में आदिवासी विरोधी मानसिकता, अत्याचार एवं शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए था.
, मणिपुर की घटना, जिसमें, दो आदिवासी महिलाओं को सरेआम पुलिस के संरक्षण से निकालकर पूरी तरह निर्वस्त्र कर पैदल घुमाया गया और इसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया. इस वीडियो के वायरल होने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि काफी धूमिल हुई है। परंतु राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से नहीं लेते हुए घटना के 2 महीने बाद कार्रवाई की, जो प्रथम दृष्टया में खानापूर्ति प्रतीत होता है। इसलिए विरोध के साथ-साथ महानगर अध्यक्ष चम्पा कुजूर ने एन. वीरेंद्र सिंह मुख्यमंत्री मणिपुर को बर्खास्त करने की मांग की है.
आदिवासी विरोधी मानसिकता का परिचायक हाल के महीनों में देश के आदिवासी बहुल प्रदेश मध्यप्रदेश में देखने को मिला। इस प्रदेश में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी, जो अपने आप को सबसे ज्यादा मर्यादित मानती है। उसके विधायक प्रतिनिधि प्रवेश शुक्ला द्वारा नशे में धुत होकर एक आदिवासी व्यक्ति के सिर, चेहरे और शरीर पर सार्वजनिक रूप से पेशाब करते हुए अपनी आदिवासी विरोधी मानसिकता को दर्शाता है.
आदिवासियों की मान- सम्मान, स्वाभिमान के साथ हो रहे तुष्टिकरण का परिचायक हाल के दिनों में और देखने को मिला कि देश की प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति महोदया द्रौपदी मुरमू को आदिवासी होने के कारण मंदिर जाने से रोक दिया जाता है.
वर्तमान केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर समान नागरिक संहिता लाने पर विचार कर रही है इसका राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा घोर विरोध करती है. चूंकि आदिवासी समुदाय अपनी विशिष्ट धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, रूढ़िवादी पारंपरिक व्यवस्था से संचालित है, जिसके कारण समाज अमन चैन से है. यदि UCC आदिवासियों पर थोपा जाता है तो आदिवासियों की विशिष्ट व्यवस्था / पद्धति समाप्त हो जाएगी. फलत: आदिवासी समाज समाप्त हो जाएगा.
झारखंड जैसे आदिवासी बहुल प्रदेश के मुखिया हेमंत सोरेन भी आदिवासी हैं. अतः समिति पुरजोर मांग करती है कि हेमंत सरकार यूसीसी के संदर्भ में अपना मन्तव्य स्पष्ट करें कि समर्थन में है या विरोध में? पंजाब सरकार के साथ-साथ उत्तर – पूर्व के कुछ राज्य ने स्पष्ट किया है कि वह यूसीसी की विरोध में हैं।
समिति ने झारखंड सरकार का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट किया कि आए दिन झारखंड राज्य में भी आदिवासियों के साथ मारपीट की घटनाएं काफी बढ़ गई है। जिस पर राज्य सरकार से मांग की जाती है कि आदिवासी विरोधी मानसिकता वाले अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को सख्त से सख्त सजा दी जाए।
आदिवासियों की व्यक्तिगत भूमि के साथ-साथ धार्मिक – सामाजिक भूमि की लूट को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने का निर्देश संबंधित उपायुक्त को दिया जाए; इस मांग को लेकर महानगर समिति आने वाले समय में बड़ा आंदोलन करने की रूपरेखा तैयार कर रही है।
पैदल मार्च में मुख्य रूप से अध्यक्ष चम्पा कुजूर, ज्ञान मुंडा, दुर्गा उरांव, फूलो कच्छप, पवन टोप्पो, मंगा उरांव, अर्जुन गाड़ी, करमा गाड़ी, संगीता मुंडा, सुधीर उरांव, सोमारी उरांव, मुन्नी लकड़ा, संगीता टोप्पो, अनीता असुर, देवंती खलखो, संगीता तिर्की, सुशीला लकड़ा, रजनी तिर्की, नेहा कच्छप, विनीता तिर्की सहित अन्य लोग उपस्थित हुए.