राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स में व्यवस्था सुधारने के दावे स्वास्थ्य मंत्री से लेकर अधिकारी कर रहे है. वहीं मरीजों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने की भी बात अधिकारी कर रहे है. लेकिन हॉस्पिटल में अव्यवस्था कम होने का नाम ही नहीं ले रही है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 100 बेड के न्यू ट्रामा सेंटर सह सेंट्रल इमरजेंसी के चालू होने के बावजूद एक्सीडेंट में घायल मरीजों की परेशानी कम नहीं हो रही है. वहीं न्यूरो वार्ड अब पहले से ज्यादा ओवरलोड है. ऐसे में मरीजों का जमीन पर ही इलाज हो रहा है. इतना ही नहीं मरीजों को टाइम से दवाएं और इंजेक्शन भी नहीं मिल पा रही है.
गैलरी में पहले से ज्यादा मरीज
न्यूरो वार्ड में मरीजों के लिए लगभग 90 बेड है. जिसमें आइसीयू से लेकर नार्मल बेड शामिल है. इसके अलावा 100 मरीज जमीन पर मैट्रेस बिछाकर इलाज करा रहे है. चूंकि वार्ड में बेड की तुलना में लगभग दोगुने मरीज है. वहीं पहले की तुलना में अब मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है. हालांकि स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि मरीजों का इलाज जमीन पर नहीं होगा और मरीजों को खाली पड़े वार्डों में बेड दिए जाएंगे. लेकिन यह निर्देश भी ठंडे बस्ते में चला गया.
टाइम से दवा और स्लाइन नहीं
इनडोर में एडमिट मरीजों को लोड काफी अधिक है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो पहले एडमिट मरीजों को स्लाइन तक नहीं चढ़ाया जा सका है. जब इसकी शिकायत की गई तो नर्सिंग इंचार्ज ने स्लाइन लगाने का निर्देश जूनियर स्टाफ को दिया. इसके अलावा मरीजों को दवाएं तो दूर प्रापर केयर भी नहीं मिल रही है. स्लाइन लगाने के लिए भी जरूरी इक्विपमेंट्स नहीं है. ऐसी स्थिति में गेट, तार व अन्य चीजों के जुगाड़ से स्लाइन लगाया जा रहा है.
ट्रामा सेंटर में 50-50 बेड सेपरेट
हॉस्पिटल में न्यू ट्रामा सेंटर सह सेंट्रल इमरजेंसी बनाया गया है. जहां पर दोनों ही विभागों के लिए 50-50 सेपरेट बेड है. वहीं हर बेड पर हाइटेक सुविधाएं है. जहां पर गंभीर मरीजों के इलाज की सारी सुविधाएं मौजूद है. पैथोलॉजी टेस्ट से लेकर सीटी स्कैन, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड सब एक ही छत के नीचे है. फिर भी मरीजों का लोड अधिक है.