रांची पहुंचे मणिपुर के छात्र लीडर कहा-

पांच महीने से ठप है पढ़ाई रांची में पढ़ना चाहते हैं कई छात्र

रांची पहुंचे मणिपुर के छात्र लीडर कहा-

रांची :

मणिपुर के दो छात्र नेता रांची में हैं. रांची आने की वजह है मणिपुर के ट्राइबल समुदाय जिनमें कुकी, जोमी, मार जनजाति शामिल हैं के करीब 400 कॉलेज छात्र छात्राओं का एडमिशन कराना जिनकी पढ़ाई बंद हैं. रांची आकर करमटोली स्थित धुमकुडिया में इन्होंने यहां के आदिवासी समुदाय के साथ मणिपुर के हालात पर भी चर्चा की. पूर्व मंत्री देवकुमार धान, वासवी और प्रेमशाही मुंडा की उपस्थिति में इन छात्रों ने अपनी बातें रखी. बताया कि झारखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री से भी मिलने का समय मांगा था. वे चाहते हैं कि मणिपुरी छात्रों की पढ़ाई के लिए झारखंड सरकार भी मदद करे.

मणिपुर के आदिवासी छात्र नेता का गोउलूल और जेसी जोउलीएनत्लांग ने कहा कि रांची में 20 छात्रों के लिए संभावनाएं देख रहे हैं. शेष 380 छात्रों के लिए देश के अलग अलग शहरों के यूनिवर्सिटी में जाकर बात हो रही हैं. पंजाब यूनिवर्सिटी में दो छात्रों का एडमिशन हुआ है जबकि 15 विद्यार्थियों के लिए नागपुर में बात हुई है. सामाजिक कार्यकर्ता वासवी ने कहा कि केरल के कुन्नूर में 110 विद्यार्थियों का एडमिशन हुआ है. केरल सरकार विद्यार्थियों को पूरी तरह से सपोर्ट कर रही है.

छात्र स्नातक, स्नातकोत्तर पीएचडी और विधि संकाय से जुड़े हैं. 

रांची आए छात्रों की बात रांची विश्वविद्यालय के वरीय अधिकारियों से हुई है. संत ज़ेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य से भी एडमिशन को लेकर चर्चा हुई है.

गोउलूल और जेसी जोउलीएनत्लांग ने बताया कि 3 मई को जब दंगा हुआ तो इंफाल में चुन चुनकर कुकी समुदाय के लोगों को टार्गेट किया गया. घरों को जलाया गया. जो मिले उन्हें मार दिया गया. जो ट्राईबल्स पहाड़ों में आपने क्षेत्रों में लौट सके वो बच गये. पर पांच महीने के बाद भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. कुकी पहाड़ों में है और मैतेई घाटी यानी इ़ंफाल में. 297 गांव जला दिए गये हैं. तकरीबन 20 हजार लोग शरणार्थी शिविरों में है. पहाड़ी क्षेत्रों में सरकार की राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही. दूसरे शहरों में रहनेवाले कुकी अपने लोगों की मदद के लिए पैसे, पुराने कपड़े आदि भेज रहे हैं पर जो हालात है वह बेहद खराब हैं.

छात्र नेताओं ने कहा कि हम इंफाल या मैतेई क्षेत्रों में नहीं जा सकते. अगर गये तो मार दिए जायेंगे. क्या हालात कभी पहले की तरह सामान्य होंगे? इस सवाल पर कहा कि यह कहना मुश्किल है. हमें लगता है कि  इतिहास 3 मई के बाद  से बदल चुका है. अब मणिपुर पहले जैसा कभी नहीं हो सकता. शांति की संभावना सिर्फ तभी है जब हमें अपना अलग प्रशासनिक व्यवस्था दी जाये. छात्रों ने कहा कि मेनस्ट्रीम मीडिया में मणिपुर नहीं है. जो थोड़ा बहुत दिखा भी वह एकपक्षीय है और इंफाल तक सीमित हैं. कुकी समुदाय के बारे में मीडिया में जिस तरह दुष्प्रचार किया गया उससे भी वे आहत हैं.

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