मध्यस्थता से सुलझा पति-पत्नी का विवाद, फिर से करेंगे नई पारी की शुरूआत

तीन वर्षों से न्यायालय में लंबित था मामला, एक अन्य मामले में दो भाइयों के बीच भूमि विवाद को सुलझाया गया

मध्यस्थता से सुलझा पति-पत्नी का विवाद, फिर से करेंगे नई पारी की शुरूआत

रांची :

मध्यस्थता के जरिये एक और परिवार को बिखरने से बचा लिया गया. पति पत्नी के बीच चल रहे विवाद को सुलझाते हुए दोनों के बीच समझौता कराया गया है. वहीं, एक अन्य मामले में दो पक्षों के बीच भूमि विवाद को भी सुलझाया गया है. यह दो प्रकरण बता रहे हैं मध्यस्थता के जरिए विवादों को किस तरह सुलझाया जा सकता है.

मध्यस्थता केंद्र, रांची में वाद संख्या ओ.एम. 289 / 2022 जो संजिता श्रीवास्तव, अतिरिक्त प्रधान न्यायायुक्त-1 के न्यायालय से मध्यस्थता के लिए आया था. इस मामले को मध्यस्थ निर्मल रंजन एवं दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के अथक प्रयास से सुलझा लिया गया. वाद में आवेदिका अन्नपूर्णा कुमारी व द्वितीय पक्ष राजेश कुमार दोनों पति-पत्नी हैं.

दोनों का विवाह 19 जून 2019 को हुआ था।. दोनों का एक ढाई वर्ष का पुत्र है. आपसी मतभेद के कारण दोनों पक्षों में विवाद उत्पन्न हुआ था. पति-पत्नी दो वर्षों से अलग रह रहे थे. 

मध्यस्थता के दौरान मध्यस्थ एवं अधिवक्ताओं के द्वारा समझाने पर दोनों पक्ष फिर से साथ-साथ रहने के लिए राजी हो गये हैं. दोनों पक्ष ने यह वायदा किया हैं कि पुराने विवाद को भुला देंगे. दोनों अपने गृहस्थ जीवन में संतुष्ट होने पर एक-दूसरे पर जो भी केस किए हैं उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत समाप्त कर लेंगे. दोनों ने यह भी कहा कि एक दूसरे के माता-पिता का सम्मान करेंगे. भविष्य में दोनों पक्ष कोई शिकायत का मौका एक दूसरे को नहीं देंगे.

डालसा सचिव राकेश रंजन ने भविष्य में मन-मुटाव न करने की सलाह दी तथा दोनों के उज्जवल भविष्य की कामना की. उक्त वाद को सुलझाने में मध्यस्थ निर्मल रंजन एवं अधिवक्ता क्रमशः श्री रामजी व विनोदानंद झा का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

एक अन्य मामले में सुलझाया भूमि विवाद

रांची : मध्यस्थता केंद्र, रांची में मध्यस्थता के माध्यम से वाद संख्या ओ.एस. 446/2018 जो कि माननीय श्री विक्रम आनंद, सब जज-6 के न्यायालय से मध्यस्थता केंद्र, रांची में मध्यस्थता के लिए आया था, जिसे मध्यस्थ कुमारी शिला एवं दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के प्रयास से सुलझा लिया गया. वाद में आवेदक रामकेश्वर कुजूर द्वितीय पक्ष महली उरांव, बलदेव उरांव वगैरह पर वाद दायर किया था.

मध्यस्थता से सुलझा पति-पत्नी का विवाद, फिर से करेंगे नई पारी की शुरूआत

मामले में प्रथम पक्ष रामकेश्वर कुजूर ने अपने पुश्तैनी जमीन के बंटवारा हेतु उपरोक्त केस द्वितीय पक्षों के खिलाफ न्यायालय में दायार किया है क्योंकि वादी एवं प्रतिवादी के पिता आपस में सहोदर भाई थे. उन्होंने अपने जीवनकाल में जमीन का कोई बंटवारा नहीं किया था.

मध्यस्थता के दौरान मध्यस्थ एवं अधिवक्ताओं के द्वारा समझाने पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी. तय हुआ कि पूर्वज बंधक के रूप में दूसरे को दिये थे, उसे दोनों पक्ष छुड़ाकर आधा-आधा हिस्सा वहन करेंगे. बंटवारा के बाद यदि भविष्य में प्रथम पक्ष अपने हिस्से की जमीन बेचना चाहेंगे, तो सर्वप्रथम द्वितीय पक्ष को ही बेचेंगे. दोनों पक्ष जहां भी पुश्तैनी जमीन इसके अतिरिक्त कहीं भी होगा, उसे आपस में आधा-आधा बांट लेंगे.

ज्ञात हो कि दोनों पक्ष बंटवारा पूर्ण होने तक अपने पुश्तैनी जमीन का कोई भी हिस्सा किसी अन्य को नहीं बेचेंगे.

इस प्रकार उक्त वाद को सुलझाने में मध्यस्थ कुमारी शिला एवं अधिवक्ता क्रमशः रामकेश्वर कुजूर व महली उरांव का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

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