
डॉ कामिल बुल्के के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है – डॉ इम्मानुएल बाखला
रांची.
डॉ कामिल बुल्के की जयंती शुक्रवार को मनरेसा हाउस रांची में मनाई गई. डा कामिल बुल्के शोध संस्थान, होफमैन ला एसोसियेट, सत्य भारती, कैथोलिक प्रेस, उर्सलाईन कान्वेंट,संत अन्ना कान्वेंट, और नाज़रेथ सिस्टर्स रांची के संचालक गणों ने डॉ कामिल बुल्के की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी.
इस अवसर पर डॉ कामिल बुल्के शोध संस्थान के निदेशक डॉ इम्मानुएल बाखला ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉक्टर कामिल बुल्के ने भारत देश की सभ्यता, संस्कृति, इतिहास और परंपरा को आत्मसात कर लिया था. तभी तो वे एक मिशनरी होते हुए भी भारतीय भाषाओं के प्रकांड विद्वान के रूप में जाने जाते हैं. रामचरित मानस के अनुवाद, संस्कृत हिन्दी साहित्य और हिन्दी, अंग्रेजी डिक्सनरी के रचयिता डॉ कामिल बुल्के को आज़ विश्व नमन करता है.
होफमैन लॉ एसोसियेट के निदेशक फादर महेंद्र पीटर तिग्गा ने भी डॉ कामिल बुल्के की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उन्हें भारत का अनमोल रत्न बताया.
पूर्व प्राचार्य जेम्स टोप्पो ने डॉ बुल्के के साथ बिताए मधुर क्षणों को साझा किया.
टीएसी के पूर्व सदस्य रतन तिर्की ने भी डॉ बुल्के को श्रद्धासुमन अर्पित कर कहा कि प्रेस चौराहे का नामकरण डॉ बुल्के के नाम से रखने का प्रस्ताव नगर निगम को दिया गया है. इसी वर्ष के अंत में डा बुल्के की प्रतिमा मिशन चौक में स्थापित की जायेगी.
आज श्रद्धांजलि श्रद्धासुमन अर्पित करने वाले गणमान्य लोगों में समाजसेवी बलराम जी, डाक्यूमेंट्री फिल्म मेकर प्रबल महतो, डॉ कामिल बुल्के शोध संस्थान निदेशक के डॉ इम्मानुएल बाखला, होफमैन ला एसोसियेट निदेशक महेंद्र पीटर तिग्गा, पा जेम्स टोप्पो, लोयोला ट्रेनिंग सेंटर निदेशक फा मुकुल लकड़ा,सत्य भारती निदेशक फादर अलेक्सियूस तिर्की, कैथोलिक प्रेस के निदेशक फा जोन ज्योति कुजूर,पा कुलवंत मिंज,फा दोमनिक टोपनो, उर्सलाईन कान्वेंट की पूर्व प्राचार्य सिस्टर जुलिया जोर्ज, अधिवक्ता सिस्टर मुक्ता मरांडी, स्वीटी केरकेट्टा,सोनी केरकेट्टा, प्रदीप नगडुआर,आदि शामिल थे.