डॉक्टरों ने सीएम को लिखा पत्र, विधानसभा सत्र में पारित करे मांगों को

RANCHI: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, झारखंड और झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन (आइएमए और झासा) के बैनर तले डॉक्टरों ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। इस दौरान लंबित मांगों दोहराते हुए उनसे तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। वहीं कई मांगों को दोहराया गया है जिससे कि मरीजों के इलाज में कोई परेशानी न हो। साथ ही यह भी कहा है कि सरकार और विभाग दोनों से आश्वासन मिला था। उन्होंने कहा कि सरकार हमें वार्ता के लिए बुलाए और मांगों को 27 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में इसे पारित कराए। नहीं तो सभी डॉक्टर आंदोलन करेंगे और इसकी पूरी जवाबदेही सरकार की होगी।

चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी

डॉक्टरों ने कहा कि कुछ मांगों के प्रति आपकी भूमिका सराहनीय रही है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य से जुड़े सभी आम जनों को इससे संबंधित महत्वपूर्ण ,ठोस और निर्णायक घोषणा की उम्मीद है। राज्यभर के सभी प्राइवेट और सरकारी डॉक्टरों ने आम जनता के स्वास्थ्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। कोविड-19 के तीनों लहरों के वक्त भी अपनी पूरी क्षमता से कार्य किया। लेकिन सरकार और विभाग के उदासीन रवैया से आहत है और अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इस विधानसभा सत्र के दौरान अगर इन मुद्दों को पारित नहीं किया जाता है, तो संगठन चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को बाध्य होगी।

ये मांगे दोहराई गई

क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट में आवश्यक संशोधन, हरियाणा, उत्तर प्रदेश की तर्ज पर 50 बेड तक के हॉस्पिटलों को क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट से मुक्त रखा जाए

मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करे वर्तमान में भारतवर्ष के 23 राज्यों में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू है। जिन राज्यों में यह लागू है ,वहां मरीजों का रेफरल कम है और परिणाम स्वरूप मृत्यु दर कम है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मारपीट की घटना व तोड़फोड़ की घटना को कम किया जा सकेगा

बायोमैट्रिक अटेंडेंस में डॉक्टरों को छूट दी जाए। सरकार ने सूझबूझ से पुलिस विभाग को इमरजेंसी सर्विसेस मानते हुए बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से मुक्त करने की घोषणा की है। जबकि इमरजेंसी सर्विसेज की सूची में स्वास्थ्य सेवा सबसे पहले है

जामताड़ा के विधायक इरफान अंसारी के द्वारा सिविल सर्जन जामताड़ा को घसीट कर लाने जैसी अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया है। इस पर संज्ञान लेते उचित करवाई की जाए

धनबाद के डॉक्टर दंपत्ति डॉ विकास हाजरा एवं डॉ प्रेमा हाजारा की आग लगने से आकस्मिक मृत्यु हो गई। जिस तरह धनबाद के ही आशीर्वाद अपार्टमेंट में आग से मृत्यु पर सरकार प्रति व्यक्ति चार लाख की राशि दे रही है। इसलिए डॉक्टरों को भी राज्य सरकार राशि मुहैया कराए।

रिम्स रांची के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सौरभ शर्मा की ड्यूटी जाने के क्रम में सड़क दुर्घटना में मौत के बाद सरकार उन्हें भी चार लाख की राशि दे और उनकी पत्नी डॉ खुशबू, जो खुद एनेस्थिसिस्ट है, उन्हें सरकारी नौकरी दे

फायर सेफ्टी के एनओसी के लिए निर्धारित शर्तों को सरल बनाया जाए ताकि सभी हॉस्पिटलों में जहां इनडोर हो वहां पुख्ता इंतजाम किया जा सके। जहां पर इनडोर में मरीज भर्ती नहीं लिए जाते, वैसे स्वास्थ्य केंद्र को इससे मुक्त रखा जाए

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