घाटशिला के श्याम मुर्मू का कमाल, बनाया ओल चिकी फोंट, पब्लिकेशन में मिलेगी सहायता

घाटशिला के श्याम मुर्मू का कमाल, बनाया ओल चिकी फोंट, पब्लिकेशन में मिलेगी सहायता

रांची. 

घाटशिला के युवा श्याम मुर्मू उन युवाओं में हैं जो न सिर्फ लीक से हटकर सोचते हैं, बल्कि जो सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े हैं.

2013 में श्याम ने एक वेबसाइट बनाया था जो संताली सीखने वालों के लिए काफी उपयोगी था.  संताली दिशोम.कॉम नामक यह वेबसाइट अभी भी चल रहा है. इसके जरिये इन्होंने ई स्कूलिंग के माध्यम से संताली भाषा सिखाया. 

अब श्याम ने एक और विस्मयकारी काम कर दिखाया है. उन्होंने संताली भाषा की लिपि ओल चिकी का डिजीटल फोंट तैयार कर लिया है. इसका इस्तेमाल पब्लिकेशन में किया जा सकता है. श्याम ने बताया कि पहले से ही ओल चिकी का फोंट उपलब्ध है पर उनमें कई खामियां हैं. मिसाल के तौर पर किसी लेख के हेडिंग और पैराग्राफ का फोंट साइज बराबर है जो अच्छा नही लगता. अपने बनायें फोंट में उन्होंने इन खामियों को दुरुस्त किया है. कई और दूसरी विशेषताएं भी है.

श्याम ने कहा कि भाषा और लिपि पर काम करना आसान नहीं होता. क्योंकि इसमें काफी बारीकियों को समझना होता है. साथ ही कई तकनीकी  चुनौतियां भी थी. इस काम को करने में उन्हें लगभग तीन साल लगें.

अब जल्दी ही वे इसे औपचारिक रूप से जारी करेंगे.

बता दें कि श्याम मुर्मू ने कंप्यूटर का कोई औपचारिक कोर्स नहीं किया है. पर कंप्यूटर में रूचि और लगन होने की वजह से आज वे इस मुकाम पर हैं जहां वे वेबसाइट डिजाइन से लेकर अन्य तकनीकी कामों में सिद्धहस्त हैं.

गौरतलब है कि अभी भी गिनीचुनी जनजातीय भाषा है जिसकी अपनी जुदा लिपि भी है. और ऐसी जनजातीय भाषा तो उंगली पर है जिसका डिजीटल फोंट बनाया गया है. संताली इस मामले में भाग्यशाली है कि उसके पास लिपि भी है और जिसपर  तकनीकी काम भी हुआ है. जब 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मू ने ओल चिकी लिपि का आविष्कार किया था तो वह एक तारीख (इतिहास ) थी. और श्याम ने जो काम कर दिखाया है वह भी एक बड़ी उपलब्धि है. निसंदेह इससे संताली भाषा और लिपि के प्रचार प्रसार में सहायता मिलेगी.

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