भाजपा प्रायोजित है कुड़मियों का रेल रोको आंदोलन : आदिवासी संगठन

भाजपा प्रायोजित है कुड़मियों का रेल रोको आंदोलन : आदिवासी संगठन

रांची:

कुड़मियों का आदिवासी होने का दावा विरोधाभासपूर्ण और नायाजायज है. न तो ऐतिहासिक, न सामाजिक, न पारंपरिक, न सांस्कृतिक और वैचारिक तौर पर किसी भी मूल आदिवासियों से उनकी समानताएं नहीं है. कुरमी / कुड़मी जाति आदिवासी नहीं है. इसके बावजूद उनकी आदिवासी (एसटी) बनने की मांग न सिर्फ गलत है बल्कि अपनी नाजायज मांग मनवाने के लिए रेल रोको आंदोलन केंद्र सरकार को ब्लैकमेल करने की साजिश है. इस मांग का आदिवासी समाज विरोध करता है. उक्त बातें आज अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की अध्यक्षता गीताश्री उरांव और अखिल भारतीय मुंडा परिषद के मुख्य संयोजक लक्ष्मी नारायण मुंडा ने संवाददाता सम्मेलन में कही. इस दौरान कहा गया कि कुड़मियों का रेल रोको आंदोलन भाजपा प्रायोजित और संरक्षित है.

नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि कि झारखंड में कुरमी/ कुड़मी जो एक डोमीनेटि़ग कास्ट है जो आदिवासियों से ज्यादा समृद्ध जाति है वह आदिवासी (एसटी ) बनने की मांग क्यों कर रही है?  कभी खुद को क्षत्रिय बताते हुए बूटी मोड़ में शिवाजी की प्रतिमा स्थापित करने वाले लोग अब आदिवासी  बनना चाहते हैं तो इसके पीछे क्या कारण है?

उन्होंने कहा कि यह तय है कि कुरमी/ कुड़मी के आदिवासी सूची में शामिल  होने से मूल और वास्तविक आदिवासियों का हक मारा जायेगा और केंद्र सरकार को इससे बचना चाहिए.  कुरमी / कुड़मी के आदिवासी की सूची में शामिल होने से मूल आदिवासियों की राजनीतिक प्रतिनिधित्व हिस्सेदारी, नौकरी आदि छिन जायेंगे और झारखंड में सिर्फ एक कास्ट (कुरमी /कुड़मी ) का ही वर्चस्व होगा. इससे झारखंड की आदिवासी और मूलवासी  जनता के बीच के सौहार्द और समरसता पर असर पड़ेगा.

नेताओं ने कहा कि कुरमी/कुड़मी  आदिवासी क्यों नहीं है इसके ठोस प्रमाण भी है. ये हैं-

1. 1894 में कुड़मी क्षत्रिय महासभा का आयोजन उत्तर प्रदेश के लखनऊ  में हुआ था. इसमें  सिंहभूम, मानभूम (झारखंड ) से कुड़मी  समाज के तीन प्रतिनिधि शामिल हुए  जो  हिंदू सनातनी संस्कृति  के प्रतीक जनेऊ धारण किए. क्या कुरमी भाई यह बतायेंगे कि यह आदिवासियों का आयोजन था ?

2. सेंसेक्स ऑफ़ इंडिया 1931 में तात्कालीन  बिहार और उड़ीसा के जिन आदिवासी समुदाय की सूची है उसमें कहीं भी कुरमी /कुड़मी  का जिक्र नहीं है.

3. झारखंड के कुरमी /कुड़मी  जाति का महाराष्ट्र के छत्रपति शिवाजी से क्या संबंध हैं? उन्हें यह अपना पूर्वज किस आधार पर मानते हैं? सन 2007-08 में बूटी मोड़ रांची में स्थापित छत्तपति शिवाजी की मूर्ति का अनावरण स्व गोपीनाथ मुंडे महाराष्ट्र के तात्कालीन  कैबिनेट मंत्री के हाथों कुरमी/कुड़मियों ने क्यों कराया था? 4. 2004 में जनजातीय शोध संस्थान के शोध प्रतिवेदन के आधार पर अहर्ता  पूरी नहीं, करने के कारण तात्कालीन केंद्र सरकार ने कुरमी / कुड़मियों की अनुसूचित जनजाति संबंधी मांग को खारिज कर दिया था.

5. अभी हाल ही में कोलकाता हाईकोर्ट ने कुरमी/ कुड़मियों की अनुसूचित जनजाति संबंधी मामले को खारिज क्यों किया था?  

6. जस्टिस बीएन लोकुर ने 1965 में किसी भी समुदाय को आदिवासी घोषित करने के लिए पांच मानकों की सिफारिश की थी उनमें कुड़मी खरे नहीं उतरते.

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