यूनिफॉर्म सिविल कोड आदिवासियों को मंजूर नहीं : देवकुमार धान

यूनिफॉर्म सिविल कोड आदिवासियों को मंजूर नहीं : देवकुमार धान

रांची.

आदिवासी महासभा के संयोजक व पूर्व मंत्री देव कुमार धान ने विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि देश के प्रधानमंत्री के द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में दिया गया बयान दुर्भाग्यपूर्ण है. श्री धान ने कहा कि इस देश के आदिवासियों के लिए यह काला दिन है. देश के प्रधानमंत्री के द्वारा संविधान के विपरीत जाकर यूनिफॉर्म सिविल कोड नहीं बल्कि हिंदू सिविल कोड पूरे देश में लागू करने का निर्देश देना पूरे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने से इस देश से आदिवासी विलुप्त हो जाएंगे उनकी जमीन छीन जाएगी, उनका आरक्षण खत्म हो जाएगा, उनकी विशिष्ट परंपरा और रीति रिवाज सब कुछ खत्म हो जाएगा. झारखंड से सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, विलकिंसन रूल, पेशा कानून और पूरे देश से पांचवी एवं छठी अनुसूची क्षेत्र समाप्त हो जाएगा.

 अगर यह सभी समाप्त हो जाएंगे तो आदिवासी खत्म हो जाएंगे. प्रधानमंत्री का बयान देखकर ऐसा लगता है कि वह एक धर्मनिरपेक्ष देश को एक हिंदू राष्ट्र बनाने पर अमादा है. प्रधानमंत्री की इस कोशिश का पूरे देश के आदिवासी विरोध करते हैं और कड़े आंदोलन करने की चेतावनी देते हैं. देव कुमार धान ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र था है और हमेशा रहेगा.

 इसे यूनिफॉर्म सिविल कोड के बहाने हिंदू राष्ट्र बनाने के किसी भी कोशिश का आदिवासी समाज पुरजोर विरोध करता है. प्रधानमंत्री के द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में दिया गया बयान एक तानाशाही बयान है.

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