राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खूंटी में आयोजित महिला सम्मेलन में हुईं शामिल

मुख्यमंत्री ने सरना धर्मकोड और हो ,मुंडारी तथा कुड़ुख़  भाषा को संविधान की आठवीं सूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार से पहल करने की मांग की.

खूंटी.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खूंटी में आयोजित महिला सम्मेलन में हुईं शामिल

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू आज बिरसा मुंडा स्टेडियम, खूंटी में आयोजित महिला स्वयं सहायता समूह सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप मे शामिल हुईं. इस अवसर पर राष्ट्रपति ने स्वयं सहायता समूह की दीदियों द्वारा लगाए गए स्टॉल्स का भ्रमण किया और उनके साथ सीधा संवाद किया.

राष्ट्रपति ने कहा कि झारखंड का जितना विकास होना चाहिए था उतना विकास नहीं हुआ. मैं आशा करती हूं कि आनेवाले दिन में विकास होगा.

महिला समूहों ने जो प्रोडक्ट बनाये हैं उन्हें देखा. उनके चेहरे पर मुस्कान है उसका भी राज जानने की कोशिश की है. इन्हें देखकर मुझे अपनी किशोरावस्था याद आती है. राष्ट्रपति ने कहा कि मैं ओडिशा की जरूर हूं पर झारखंड का खून मेरे शऱीर में है.

सम्मेलन में माननीय राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन, माननीय मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, जनजातीय कार्य मंत्रालय के माननीय  केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा,  जनजातीय कार्य मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह सरूता, झारखंड सरकार में मंत्री जोबा मांझी, विधायक कोचे मुंडा, विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा विधायक विकास सिंह मुंडा  एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कड़िया मुंडा समेत कई गणमान्य उपस्थित थे.

 इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरना धर्म कोड और हो मुंडारी एवं कुड़ुख़ भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए. उन्होने केंद्र सरकार से सरना धर्म कोड लागू करने और हो, मुंडारी और कुड़ुख़ भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में पहल करने की मांग की. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अस्मिता और पहचान को बनाए रखने के लिए यह  जरूरी है, क्योंकि यह  उनके मान -सम्मान के साथ जुड़ा हुआ है.

आदिवासी समाज अपनी संस्कृति, सभ्यता, भाषा, परंपरा और पहचान के साथ निरंतर आगे बढ़े. आदिवासियों को पूरा मान- सम्मान और अधिकार मिले, इसका हमने संकल्प ले रखा है. इस दिशा में राज्य सरकार हर मोर्चे पर केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय आर्थिक रूप से कैसे समृद्ध हो इस पर हम सभी को गंभीरता से विचार करते हुए धरातल पर कार्य करना होगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के 14 हज़ार से ज्यादा ऐसे गांव हैं, जो वन उपज से सीधे जुड़े हुए हैं.  लाह, इमली, करंज और शहद जैसे कई वन उपज का उत्पादन कर रहे हैं. लेकिन, उन्हें एमएसपी तय नहीं होने से बाजार मुल्य  से काफी कम कीमत मिलती है. यहां बिचौलिया हावी हैं. हमारी सरकार ने  सिदो कान्हू कृषि एवं वनोपज फेडरेशन का गठन किया है. इसके माध्यम से उनके वन उपज को एकत्रित किया जाएगा और किसानों को इसका बाजार मूल्य देने का काम करेंगे.

वन उपजों के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने वन उपज के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर जोर दिया ताकि इसका बेहतर तरीके से इस्तेमाल और सदुपयोग हो सके. उन्होंने कहा कि इस दिशा में जल्द ही किसान मेले का आयोजन होगा और किसानों को इससे संबंधित जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाएगा.

 लैम्प्स -पैक्स एवं वन समिति को कर रहे मजबूत

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिदो कान्हू कृषि एवं वनोपज फेडरेशन के माध्यम से लैम्प्स -पैक्स एवं वन समिति को मजबूत कर रहे हैं. इस दिशा में राशि उपलब्ध करा दी गई है. इसके साथ महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा उत्पादित उत्पादों को पलाश ब्रांड के जरिए बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है. मुझे यह बताते हुए खुशी है कि पलाश ब्रांड के तहत महिला स्वयं सहायता समूह के उत्पादों की मांग जिस तेजी से बढ़ रही है, उसकी तुलना में उत्पादन नहीं हो रहा है. ऐसे में उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में भी हम कदम पढ़ा रहे हैं ,ताकि इसका लाभ लोगों को मिल सके.

इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव श्री अनिल कुमार झा, भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्राईफेड) के मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीमती गीतांजलि गुप्ता और महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं हजारों महिलाएं मौजूद थीं.

Leave a Comment