
रांची.
आर्थिक संकट से जूझते एचईसी को बचाने को लेकर शुक्रवार को बिहार क्लब में इंडिया गठबंधन के सदस्यों की बैठक हुई. बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गठबंधन के सदस्य व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय ने कहा की चंद्रयान के लिए लांचिग पैड बनाने वाली कंपनी एचईसी आज गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है. कंपनी के अधिकारी व कर्मचारियों को बीते 18 महीने से वेतन नहीं मिला है. मोदी सरकार को इसकी फिक्र नहीं है बल्कि वह पब्लिक सेक्टर कंपनियों को बेचने का काम कर रही है.
सुबोध कांत सहाय ने कहा की एचईसी के मुद्दे को लेकर इंडिया गठबंधन के द्वारा व्यापक जन आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई है. इसके तहत 14 सितंबर को राजभवन के सामने धरना दिया जाएगा। इसके बाद संसद की विशेष सत्र के दौरान दिल्ली में 21 सितंबर को धरना दिया जाएगा जिसमें लॉन्चिंग पैड बनाने वाले एचईसी के मजदूर व कर्मी भी शामिल होंगे.
सुबोध कांत सहाय ने कहा की मोदी सरकार लगातार देश के संपत्तियों को चांद पूंजी पतियों के हाथों बेचने का काम कर रही है. एचईसी उनकी प्राथमिकता में नहीं है. यहीं वजह है कि एचईसी में 2 साल से अध्यक्ष नहीं है.
एचईसी की जमीन पर केंद्र सरकार अपने लोगों के लिए स्मार्ट सिटी बनवा रही है और दूसरी ओर एचईसी के कर्मी भूखे मरने पर विवश है. मोदी राज्य में 48 पब्लिक सेक्टर कंपनियों को बेचने की सूची तैयार कर ली गई है.
यह दुर्भाग्य की बात है कि एचईसी बनाने में ली गई कुल जमीन में 70% आदिवासियों की जमीन है. जिनकी जमीने ली गई वे आज कहां है यह किसी को वहीं पता पर मोदी सरकार की नीतियों से अब एचईसी बंद हो रहा है.
500 एकड़ जमीन का बंदरबांट किया जा रहा है . 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून में प्रावधान है कि अगर जमीन का इस्तेमाल नहीं होता है तो जमीन मूल रैयतों को वापस की जानी चाहिए पर केंद्र सरकार यह नहीं करना चाहती.
महेंद्र पाठक ने कहा कि मौका देने वाली कंपनियां को बंद किया जा रहा है यह इसलिए किया जा रहा था कि अडाणी, अंबानी जैसे पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जाए. आज वे एचईसी कोई बेच रहे हैं कल बोकारो को बेचे़गे. हमारा निवेदन है कि अगर केंद्र सरकार हक को नहीं चला सकती तो राज्य सरकार से अपने हाथों में ले और इसे चलाएं.