
रांची।
झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा का आर्थिक नाकेबंदी 16 और 17 दिसंबर को आहूत है। इन दो दिनो तक आंदोलनकारी खनिजों की ढुलाई को ठप करेंगे। राज्य से कोयला, अबरख, बॉक्साइट सहित अन्य खनिजों की ढुलाई पूरी तरह ठप रहेगी। आंदोलनकारियों के निशाने पर वे तमाम सड़क, और रेलमार्ग होंगे जिससे होकर खनिज बाहर भेजें जाते हैं।
मोर्चा की आर्थिक नाकेबंदी को भाकपा और जय आदिवासी संगठन का भी सपोर्ट मिला है। मंगलवार को मोर्चा के प्रधान सचिव पुष्कर महतो, भाकपा के महेंद्र पाठक, जय आदिवासी की निरंजना हेरेंज सहित अन्य लोगों ने संयुक्त रूप से संवाददाता सम्मेलन में आर्थिक नाकेबंदी को सफल बनाने की बात कही।
नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि झारखंड अलग राज्य का गठन हुए 23 साल हो गए हैं। दुर्भाग्य यह है कि जिस झारखंड को बनाने के लिए आंदोलनकारियों ने लाठियां खाई। जेल गए और अपने जीवन को कुर्बान किया वे ही आज उपेक्षित हैं। नाम के लिए कुछ को झुनझुना जरूर थमा दिया गया है पर बड़े पैमाने पर आंदोलनकारी उपेक्षित जीवन जी रहे हैं जबकि इसी राज्य के मंत्री विधायक सुविधा पर सुविधा ले रहे हैं।
नेताओं ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों के चिन्हितिकरण के लिए बने आयोग में महज तीन लोग हैं जिन पर आंदोलनकारियों की पहचान और चिन्हितिकरण का जिम्मा है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आंदोलनकारी के बेटे हैं पर उन्हें भी आंदोलनकारियों के दर्द का अहसास नहीं है।
नेताओं ने कहा कि 16 और 17 दिसंबर को आर्थिक नाकेबंदी अभूतपूर्व होगी। एक दिन पूर्व सभी जिलों में मशाल जुलूस भी निकाला जायेगा।