
बिनोद बाबू के सपनों का झारखंड बनाना हमारा लक्ष्य है : सुदेश महतो
रांची। समाज सुधारक, आंदोलनकारी स्व बिनोद बिहारी महतो की 100 जयंती पर शनिवार को आजसू ने राज्यभर में 100 सभाएं आयोजित की। पार्टी के अध्यक्ष सुदेश महतो ने इस अवसर पर बोकारो के चंदनकियारी में आयोजित सभा में कहा कि बिनोद बिहारी महतो एक महान समाज सुधारक और सशक्त झारखंडी दर्शन से पूर्ण नेता थे।
उन्होंने कहा कि विनोद बाबू के दर्शन और सोच से ही झारखंड बढ़ेगा, झारखंडियों को उनका हक मिलेगा। वह कहते थे पढ़ो और लड़ो, एक शिक्षित समाज ही देश राज्य का निर्माण कर सकती है। बिनोद बाबू ने इस राज्य और समाज के बारे में जो सपना देखा था वो अभी तक पूरा नहीं हो पाया। उनके सपनों में राज्य एवं राज्यवासियों के प्रगति की छाप थी वो सपना जिसे उन्होंने समाज की कुरीतियों के खिलाफ गढ़ा था।
राज्य के नई पीढ़ी पर बड़ी जिम्मेदारी छोड़ गए हैं बिनोद बाबू। नई पीढ़ी को राजनीतिक प्लेटफार्म में काम करना पड़ेगा। उनके सपनों का झारखंड बनाना ही हमारा लक्ष्य है।
स्व. बिनोद बिहारी महतो के 100वीं जयन्ती के अवसर पर पार्टी अध्यक्ष सुदेश महतो ने बोकारो जिला अंतर्गत रामडीह मोड़ और धनबाद में विनोद बिहारी महतो के बलियापुर स्थित समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने बिनोद बाबू के संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन, समाज की बुराइयों को दूर करने, लोगों को शिक्षित करने और विस्थापितों को न्याय दिलाने के लिए वे अजीवन संघर्षशील रहें। उनके अगुवाई में ही झारखंड अलग राज्य आंदोलन मजबूत हुआ जिसे आजसू पार्टी ने मुकाम तक पहुँचाने का काम किया था। वे एक ऐसे नेता थे जिन्होंने सभी वर्ग व समुदाय को एकत्रित कर झारखंड आंदोलन मजबूत करने का काम किया। वो किसी खास समाज के नहीं बल्कि जन जन के नेता थे।
विनोद बाबू ने सिर्फ पढ़ो और लड़ो का नारा ही नहीं दिया था बल्कि उन्होंने आज से 50 साल पहले स्कूल और कॉलेज को संचालित करने एवं नए विद्यालय, महाविद्यालय खोलने के लिऐ पांच लाख रुपए तक की सहायता राशि दी थी ताकि समाज के सभी वर्गों के बच्चे वहां पढ़ सकें और झारखंड के सुनहरे भविष्य की नींव मजबूत करें। उनका यह नारा मौजूदा हालात में भी प्रासंगिक है। शिक्षा के साथ साथ उन्होंने झारखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोकगीत-नृत्य को आगे बढ़ने के लिए सदैव प्रयासरत रहें और आर्थिक सहायता भी की।