
प्रवीण, रांची.
स्थान- श्री हरिकोटा, इसरो लांच पैड, तारीख 14 जुलाई 2023, वह दिन, जब इसरो ने अपने महत्वाकांक्षी चंद्रयाद-3 को लांच किया.
स्थान- इसरो मुख्यालय, चंद्रयान कंट्रोल रूम, तारीख 23 अगस्त 2023, समय- शाम 06: 06 मिनट
भारतीय अंतरिक्ष रिसर्च एजेंसी इसरो के चीफ ने घोषणा की..चंद्रयान 3 का लैंडर सफलतापूर्वक चांद के साउथ पोल पर उतर गया है. बधाई..।
और ठीक उसी समय, भारत से हजारो मील दूर, दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया. मेरे प्यारे परिवारजनों, हम अपनी आंखो के समक्ष इतिहास बनते देखते हैं. ऐसी ऐतिहासिक घटना से राष्ट्रजीवन चिरंजीवी हो जाता है. यह क्षण 140 करोड़ भारतवासियों के सामर्थ्य का है. यह क्षण नयी ऊर्जा, नये विश्वास का है. हमने धरती पर संकल्प लिया और चांद पर साकार किया. अंतरिक्ष में भारत की नई उड़ान के साक्षी बने. मानव के लिए ब्रह्मांड की संभावनाओं को तलाशने का अवसर.
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी ट्विट किया – अद्भुत..अविस्मरणीय…तिरंगे की आन बान और शान चंद्रमा पर पहुंच गया.
बीबीसी पर खबर आई- चांद पर पहुंचनेवाला चौथा देश, चांद के दक्षिण ध्रुव पर पहुंचनेवाला पहला देश..। अलजजीरा, सीएनएन, दुनियाभर के न्यूज एजेंसियों की सुर्खियां इसरो और भारत का चंद्रयान-3 बन रही है.

विक्रम लैंडर के चांद पर उतरने के साथ ही भारतीय शेयर बाजार का सेंसेक्स भी चांद की ऊंचाईयों पर पहुंच गया. देश में गजब का उत्साह..जश्न का माहौल.. और यह होना भी चाहिए क्योंकि यह क्षण, जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा, सचमुच अविस्मरणीय है. भारत ने इतिहास रच दिया है. महज चंद दिन पहले, रूस का लूना 25 भी चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के मिशन के साथ लांच हुआ.
रूसी मिशन से एकबारगी हम भारतीयों की सांसे अटक गई. रूसी लूना रॉकेट बेहद तेज गति से चंद्रमा की ओर बढ़ रहा था. ज्यादा शक्तिशाली रॉकेट जिसने चंद्रयान की तरह लंबे और घुमावदार रास्ते के बजाए सीधा रास्ता चुना. अगर वह सफल हो जाता तो भारत की उपलब्धि थोड़ी फीकी जरूर पड़ जाती. पर ऐसा नहीं हुआ. लूना का लैंडर अनियंत्रित होकर क्रैश कर गया. कछुआ और खरगोश की रेस में एक बार फिर से जीत कछुए की ही हुई.
और अब जबकि विक्रम लैंडर चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव में सफलतापूर्वक उतर चुका है. अब बारी है रोवर प्रज्ञान की. जो अगले कुछ दिनों तक चंद्रमा पर खोज करेगा. महंगाई और कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे भारतवासियों को इसरो ने खुश होने की एक वजह दे दी है.
और अंत में चंद्रमा पर 1969 को उतरने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रॉंग को उद्धृत करते हुए कि – “इंसान के लिए एक छोटा सा कदम पर , मानवजाति के लिए लंबी छलांग है.. “ इसरो की यह छलांग छोटी नहीं है..यह असाधारण है, यह इतिहास है..। शाबाश इसरो..।