अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस सह खोरठा कवि सम्मेलन का आयोजन

सांस्कृतिक मूल्यों का बोध कराती है मातृभाषा: बीएन ओहदार

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस सह खोरठा कवि सम्मेलन का आयोजन

RANCHI :

 राधा गोविंद विश्वविद्यालय रामगढ़ के सभागार में खोरठा भाषा विभाग के द्वारा  अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस समारोह सह खोरठा कवि सम्मेलन आयोजित किया गया. इस आयोजन की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ निर्मल कुमार मंडल ने की. इस अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता डॉ बीएन ओहदार, रांची विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक ने अपने उद्गार में कहा कि मातृभाषा हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है अपने सांस्कृतिक मूल्यों का बोध कराती है. वर्तमान समय में कोई आदमी तीन तरह के परिवेश में जीता है क्षेत्रीय परिवेश दूसरा राष्ट्रीय परिवेश और तीसरा अंतरराष्ट्रीय परिवेश किसी व्यक्ति को अपने क्षेत्रीय परिवेश को समझने के लिए मातृभाषा का ज्ञान जरूरी है.

   इस आयोजन में खोरठा के प्रख्यात कवि कलाकारों ने कार्यक्रम में अपने बेहतरीन प्रस्तुति से लोगों का मन मोहा. खोरठा के सुप्रसिद्ध गायक कवि सुकुमार जिसे कवि सम्मेलन की शुरुआत हुई उन्होंने मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए अपनी सुप्रसिद्ध कविता ”की दुखे तोर आंखी लोर….. का पाठ कर लोगों को भाव विभोर कर दिया. इसके बाद बोकारो से आए कवि प्रदीप कुमार दीपक ने अपने कविताओं से अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम और संस्कृति से हमें जुड़ने की प्रेरणा दी.

इस मौके पर प्रसिद्ध खोरठा  व्यंग्य कवि  ने शांति भारत शादी ब्याह में बुफे सिस्टम भोज पर जबरदस्त कटाक्ष किया और लोगों को लोटपोट कर दिया. आयोजन में लोक गायक वासु बिहारी कवि परितोष कुमार प्रजापति कवि महेंद्र नाथ गोस्वामी कवि श्यामसुंदर केवट, डॉ डी सी राम और अशोक कुमार, मणिलाल, संदीप कुमार आदि ने अपने गीतों और कविताओं की प्रस्तुति से कार्यक्रम में समा बांधा. समारोह में प्रसिद्ध मांदर वादक प्रयाग महतो और खोरठा के प्रसिद्ध शहनाई वादक प्रेमचंद कालिंदी ने युगलबंदी के खोरठा की लोक धुनों पर बेहतरीन प्रस्तुति देकर लोगों को झूमने नाचने को मजबूर कर दिया.

इस इस मौके पर खोरठा पत्रिका लोहाटी के संपादक आकाश खूंटी ने मातृभाषा दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान में खोरठा भाषा की स्थिति पर अपने विचार रखे. इन्होंने कहा की मात् भाषाओं का महत्व बढ़ रहा है. आज हमारी खोरठा भाषा में आठवीं से लेकर एनएस तब तक की पढ़ाई और विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में इसे शामिल किया जाना इसके विकास के संदर्भ में दिखा जाना चाहिए.

इस आयोजन में रांची विश्वविद्यालय सहायक खोरठा के सहायक प्राध्यापक दिनेश कुमार दिनमणि ने अपना विचार व्यक्त करते हुए और भाषाओं को बचाए रखने के लिए शिक्षण संस्थाओं के दायित्व पर प्रकाश डाला इसके साथ ही उन्होंने कहा की भाषा को बचाए रखने के लिए उनके बोलने वाले को भी जागरूक होना पड़ेगा.

 कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ निर्मल कुमार मंडल ने इस कार्यक्रम में अपने शुभकामना संदेश में इस तरह के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया और अपने संबोधन में कहा कि आज के कार्यक्रम में जिन लोगों ने पदार्पण किया है वह हमारी मात्रिभाषा और लोक संस्कृति को बचाए रखने में अहम भूमिका निभाने का काम किया है और कर रहे हैं.

इसके पूर्व समारोह में, राधा गोविंद विश्वविद्यालय रामगढ़ के द्वारा उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा सांस्कृतिक सम्मान से सम्मानित युवा खोरठा कलाकार बिनोद कुमार रसलीन को पुष्प गुच्छ व अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया.

साथ ही उपस्थित सभी कवि कलाकारों को पुष्प गुच्छ, अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया.

इस कार्यक्रम का संचालन खोरठा विभाग के विभागाध्यक्ष ओहदार ने किया.

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