आदिवासी जन परिषद की बैठक में आदिवासी महारैली को सफल बनाने की रणनीति पर हुई चर्चा

RANCHI :

आदिवासी जनपरिषद की बैठक रविवार 5 फरवरी को करमटोली स्थित कार्यालय में हुई. बैठक की अध्यक्षता प्रेम शाही मुंडा ने जबकि संचालन प्रधान महासचिव अभय भुट कुवर ने किया. इस बैठक में वर्तमान राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थिति पर गहन मंथन किया गया. 5 मार्च को आहूत महारैली को सफल बनाने की रणनीति पर भी विचार किया गया.

आदिवासी जन परिषद की बैठक में आदिवासी महारैली को सफल बनाने की रणनीति पर हुई चर्चा

बैठक में कहा गया कि आदिवासी समाज पर हर तरफ से चौतरफा हमला हो रहा है. झारखंड राज के अलग हुए 21 वर्षों के बाद कोई भी राजनीतिक पार्टियां आदिवासी समाज के हित के एक भी नीतिगत फैसले नहीं ले पाई है.  2023 जन आंदोलन का वर्ष होगा और आदिवासी समाज को करो या मरो की तर्ज पर अब लड़ाई लड़नी होगी. आज रांची क्षेत्र में आदिवासी की जमीन को सादा पट्टा/ फर्जी हुकमनामा बनाकर गैरकानूनी ढंग से आदिवासी समाज की जमीन हड़पी जा रही है. अब शोषक वर्गों से भी लड़ाई लेनी है और अपने समाज के दलालों तबके के खिलाफ संघर्ष करने की आवश्यकता है.

      आदिवासी समाज के हित में फैसले लेने में हेमंत सरकार ने अवसर खो दिया है सरकार के विरुद्ध भी लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है. बैठक में कई प्रस्ताव भी पारित किया गया इनमें-

5 मार्च 2023 को आदिवासी समन्वय समिति के तत्वाधान में आहूत आदिवासी बचाओ  महारैली को आदिवासी जन परिषद के कार्यकर्ता हजारों की संख्या में शामिल होंगे.

 आदिवासी बचाओ महारैली में शामिल होने के लिए आदिवासी समाज के मांझी परगना महाल,पाड़हा समिति, मानकी मुंडा संघ, टाना भगत जैसे धार्मिक, सामाजिक संगठनों से अपील की है कि अपना अस्तित्व बचाने के लिए मोरहाबादी मैदान पहुंचे.

राज्य सरकार ने कोर्ट फीसस बढ़ाया है इस फीस को अभिलंब राज्य व समाज हित में घटाया जाए और ट्राइबल सब प्लान के तहत आदिवासियों को निशुल्क मुकदमा लड़ने की व्यवस्था किया जाए. कोर्ट फीस नहीं घटाया गया तो होगा जन आंदोलन तेज किया जायेगा.

पुनः परिभाषित कर आंध्र प्रदेश की तर्ज पर स्थानीय नीति बनाई जानी चाहिए. साथ ही स्थानीय आदिवासी मूलवासी छात्र छात्राओं को नौकरी का मार्ग प्रशस्त किया जाए.

पंच परगना क्षेत्र में सिल्ली, सोनाहातु,राहे,बुंडू, तमाड़,क्षेत्र में गैर कानूनी ढंग से बालू का ठुलाई किया जा रहा है इसको अविलंब सरकार टास्क फोर्स बना कर रोकने की कार्रवाई करे . राहे प्रखंड के छोटन उरांव पर बालू माफिया द्वारा हमला करना के घटना को आदिवासी जन परिषद निंदा करती है और उच्च स्तरीय जांच की मांग करती है.

झारखंड में जमीन को सादा पट्टा /फर्जी कुर्सीनामा बनाकर कर आदिवासियों को जमीन छिनी जा रही है इसकी जांच सीबीआई से की जाए.

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