RANCHI :
भारत के संवैधानिक मूल्य, वर्त्तमान परिस्थितियाँ एवं लागू कानूनों विषय पर तीन दिवसीय सामुदायिक नेतृत्वकर्त्ताओं का प्रशिक्षण शनिवार को संपन्न हो गया. यह प्रशिक्षण बदलाव फाउंडेशन, काँके राँची में हुआ. गोड्डा, जामताड़ा, चतरा, पूर्वी सिंहभूम, लोहरदगा, दुमका, लातेहार, धनबाद, हजारीबाग, गढ़वा, गिरिडीह और कोडरमा के ग्रामीण क्षेत्र के 27 प्रतिभागियों ने सफलता पूर्वक 4 चरणों का नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा किया.

इस दौरान बताया गया कि देश के संवैधानिक मूल्य जिसमें समानता, स्वतंत्रता, बंधुता और न्याय की बुनियाद पर देश का सम्पूर्ण संविधान बनाया गया था. एक जागरूक भारतीय नागरिक होने के नाते सभी नागरिकों का परम दायित्व है कि संवैधानिक मूल्यों की स्थापना में अपनी भूमिका निभाएँ.
प्रतिभागियों ने जाना कि संविधान में जिन मूल्यों को अंगीकार किया गया है और संविधान में जिन अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों, नागरिक दायित्वों तथा अनुसूचियों का उल्लेख किया गया है उनको हासिल करने के लिए ही भारतीय संसद और राज्यों के विधान सभाओं से हजारों कानून बनाये गए हैं जिससे की नागरिक अधिकारों को सुनिश्चित किया जा सके.
चारों चरण के प्रशिक्षण के दौरान आम जनों, आदिवासियों, दलितों तथा ग्रामीण इलाकों में निवास करने वालों के दृष्टिकोण से पेसा कानून, वनाधिकार कानून, सूचनाधिकार कानून, मनरेगा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून, भूमि अधिग्रहण कानून, खनन सम्बन्धी कानून जैसे महत्वपूर्ण कानूनों की काफी गहराई से जानकारी दी गई. चारों प्रशिक्षण के बीच वाले अन्तराल समय में प्रतिभागियों ने अपने कार्यक्षेत्र में कानूनों के अंतर्गत संचालित सरकारी योजनाओं पर ग्रामीणों को जागरूक और संगठित करने का कार्य भी किया.
व्यावहारिक प्रशिक्षण में प्रतिभागियों का कोयला खनन प्रभावित क्षेत्र का भ्रमण भी शामिल था. आयोजित सत्रों के विशेषज्ञ के रूप में भोजन के अधिकार से जुड़े वरिष्ठ सदस्य बलराम, राज्य संयोजक अशर्फीनन्द प्रसाद, झारखण्ड नरेगा वाच के संयोजक जेम्स हेरेंज, आदिवासी मामलों के विशेषज्ञ सुनील मिंज, आफिर के फिलिप कूजुर, एनसीडीएचआर के संयोजक मिथिलेश कुमार शामिल थे. कार्यक्रम के समापन में सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र एवं संविधान की प्रस्तावना टंकित मोमेंटो प्रदान किया गया.