सत्यजीत रे सिल्वर अवार्ड का श्रेय कोयला मजदूरों को जाता है : रूपेश साहू

सत्यजीत रे सिल्वर अवार्ड का श्रेय कोयला मजदूरों को जाता है : रूपेश साहू


रांची :
झारखंड के युवा डॉक्यूमेंटरी फिल्म मेकर रूपेश साहू की फिल्म रैट ट्रैप को सत्यजीत रे सिल्वर अवार्ड फॉर सेकेंड बेस्ट डॉक्यूमेंटरी का अवार्ड मिला है। यह अवार्ड कोलकाता में आयोजित छठे साउथ एशियन शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में मिला है जिसमें साउथ एशिया के भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान सहित कई देशों के डॉक्यूमेंटरी फिल्मे प्रदर्शित की गई थी।
रूपेश साहू ने अवार्ड को कोयला मजदूरों को समर्पित किया है। कहा कि यह सम्मान उन कोयला मजदूरों का सम्मान है जिनके लिए यह फिल्म बनाई गई थी। इसके अलावा अखड़ा की पूरी टीम मेघनाथ सर, बीजू टोप्पो को भी इसका श्रेय जाता है जिनके मार्गदर्शन और सहयोग से यह फिल्म बनी है।मेघनाथ सर का तो यह ड्रीम प्रोजेक्ट था।


फिल्म कोयला मजदूरों की त्रासद जिंदगी की कहानी है


रैट ट्रैप उन लोगों की कहानी है जो चोरी छिपे कोयला चोरी करने पर विवश है। उन्हें चोरी करनी पड़ी है दो जून की रोटी के लिए। विडंबना यह है कि जिस जमीन पर आज कोयला खनन से कोयला कंपनियां और सरकार को करोडों रूपये का राजस्व मिल रहा है वह जमीन कभी इन लोगों की ही थी। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे चोरी छिपे कोयला करने के दौरान खदान धंसने से इनकी मौत हो जाती है।


कैसे फिर भी ये लोग खतरा उठाकर साईकिलों में बोरी लादकर मीलों चलकर कोयला बेचते हैं और बदले में उनके हाथ में होते हैं चंद रूपये जिससे एक दो दिन से ज्यादा पेट की भूख नहीं मिटाई जाती। कंपनियों और सरकार की सीएसआर पॉलिसी में ये कहीं नहीं है। न इन्हें साफ पेयजल उपलब्ध है और न ही इनके बच्चों को ऐसी शिक्षा मिल रही है जिससे आनेवाली पीढ़ियों का भविष्य संवर सकें। फिल्म कई सवाल भी उठाती है क्या ये लोग इस देश के नागरिक नहीं है ? क्या इन्हें एक बेहतर जिंदगी जीने का हक नहीं है?

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