
सिमडेगा.
पिछले कुछ दिनों से झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही संविधान जागार जतरा का गुरूवार को सातवां दिन था. सातवें दिन जतरा सिमडेगा पहुंची जहां ग्रामीणों को संविधान की जानकारी दी गई. प्रस्तावना का भी पाठ हुआ. इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक बलराम ने उपस्थित समुदाय को संविधान में प्राप्त अधिकारों की जानकारी दी और कहा कि संविधान को जानना, मानना और जीना जरूरी है.
संयोजक प्रभाकर तिर्की ने कहा संविधान ही समाधान है… संविधान ही अपने अधिकारों के लिए लड़ने का हथियार है। उन्होंने भाषा के अधिकार और वन अधिकार कानून पर विस्तार से बताया।
लोगों ने बताया कि रेंगारी में वन अधिकार कानून के तहत आवेदन करने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
संयोजक व टीएसी के पूर्व सदस्य रतन तिर्की ने झारखंड संविधान जागार जतरा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला और संविधान प्रस्तावना का पाठ कराया। मिथिलेश कुमार, एलेक्स और फिल्मकार प्रबल महतो ने भी लोगों से संविधान के विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की।
इसके पूर्व उपस्थित जन समुदाय ने संविधान की उद्देशिका का पाठ किया। जतरा की ओर से ग्रामीणों से १० – १० रूपया सहयोग राशि लेकर संविधान की उद्देशिक दी गयी, जिसे वे फ्रेम करके अपने घरों में लगायेंगे।
इसी तरह कल देर रात तक केला घाघ गांव में आस पास के लोगों ने संविधान जागार जतरा में भाग लिया। टीम ने प्रबल महतो द्वारा निर्मित संविधान से संबंधित डाक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया. इसमें युवाओं और महिलाओं की बड़ी संख्या थी।
केला घाघ गांव में संविधान निर्माण और १९८० के दशक में कोल्हान के जंगल आन्दोलन पर आधारित डाक्युमेंट्री फिल्म दिखायी गयी। वन अधिकार कानून २००६ इसी संघर्ष और बलिदान का परिणाम है।
संविधान जागार जतरा की सबसे खास बात यह है कि इसमें महिलाएं बड़ी संख्या में भाग ले रही हैं और चर्चा में शामिल भी हो रही हैं।
झारखंड संविधान जागार जतरा ९ जून को बिरसा मुण्डा शहादत दिवस पर खरसंवा शहीद स्थल से शुरू हुई थी। जो सरायकेला-खरसंवां, पश्चिम सिंहभूम और खूंटी जिला के विभिन्न प्रखंडों और गांवों से होते हुए सिमडेगा पहुंची है। कल भी सिमडेगा के कई गांवों में संविधान जागार जतरा के कार्यक्रम है। इसमें ग्रामीणों, छात्र – युवाओं, सरकारी कर्मचारियों और विशेष रूप से निचले स्तर के जन प्रतिनिधियों से संवाद कायम की जा रही है। रतन तिर्की ने बताया कि संविधान जागार जातरा में गांव ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की उत्सुकता दिखाई दे रही है. उन्होंने बताया कि देर रात में भी लोग जागार संविधान कार्यक्रम में भाग लेने आ रहे हैं.