किडनी, ब्लाडर व प्रोस्टेट कैंसर के लिए रांची व जमशेदपुर में मेदांता गुड़गांव की ओपीडी शुरू होगी, जांच के बाद मेदांता गुड़गांव में हो सकेगी रोबोटिक सर्जरी

रांची.
यूरो ऑंकोलॉजी यानी किडनी, ब्लाडर और प्रोस्टेट कैंसर धीरे धीरे देश में एक गंभीर समस्या का रूप ले रही है. कैंसर के कुल मरीजों में प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों की संख्या दूसरे नंबर पर है. मेदांता गुड़गांव में इस तरह के मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी की व्यवस्था है. उक्त बातें मेदांता गुडगांव के यूरो ऑकोंलॉजी व रोबोटिक सर्जरी विभाग के वॉइस चेयरमैन डॉ गगन गौतम और कंसलटेंट डॉ गोपाल शर्मा ने शनिवार को प्रेस कलब में आयोजित प्रेस वार्ता में दी.
डॉ गगन गौतम ने कहा- अभी तक झारखंड में रोबोटिक सर्जरी की व्यवस्था नहीं है। शायद एक दो सालों में यहां पर भी यह देखने को मिले. पर हमलोग रांची और जमशेदपुर में प्रोस्टेट कैंसर जैसी बीमारियों को डील करने के लिए एक्सटेंडेंट ओपीडी खोल रहे हैं. राजधानी में रांची यूरोलॉजी सेंटर, और जमशेदपुर में साकची में डॉ मिश्रा यूरोलॉजी सेंटर में हर महीने के अंतिम सोमवार को यह सुविधा उपलब्ध होगी. ओपीडी जांच के बाद जरुरत पड़ने पर मेदांता गुड़गांव में रोबोटिक सर्जरी कराई जा सकती है.
डॉ गगन ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी से कई तरह के फायदे हैं. इसमें चीरा काफी छोटा लगता है और सिर्फ़ ट्यूमर के पार्ट वाला हिस्सा ही निकाला जाता है. इसके अलावा खून का बहाव भी काफी कम होता है. इस सर्जरी में डॉ मरीज के शरीर के अंदरूनी हिस्से को आठ गुना बड़े साइज में थ्री डायमेंशनली (त्रिआयामी) देख सकता है। इससे सर्जरी करने में काफी सुविधा होती है। साथ ही सर्जरी के बाद मरीज का यूरीन भी कंट्रोल तरीके से होता है. उन्होंने कहा कि इस तरह की सर्जरी में नार्मल सर्जरी से 25 से 30 प्रतिशत ज्यादा खर्च आता है. इसकी वजह यह है कि रोबोटिक सर्जरी के उपकरण काफी महंगे होते हैं.
युवाओं में भी फैल रही यूरो ऑकोलॉजी की समस्या
डॉ गगन ने कहा कि पहले ऐसा माना जाता था कि यूरो ऑकोंलॉजी की समस्या बढ़ती उम्र के साथ होती है पर यह मिथ अब टूटता नजर आ रहा है। इस तरह की समस्या अब 18 से 25 वर्ष के युवाओं को भी होने लगी है.
आखिर क्यों हो रही है इस तरह की समस्या? इस पर उन्होंने कहा कि धूम्रपान की वजह से भी इस तरह के कैंसर का खतरा बढ़ता है. इसके अलावा इंफेक्शन व दूसरी वजह से भी इस तरह के कैंसर होते हैं.