RANCHI : 16 दिवसीय महिला लैंगिक हिंसा प्रतिरोध पखवाड़ा के अवसर पर रांची के एचआरडीसी सभागार में परिचर्चा का आयोजन हुआ. आदिवासी वीमेंस नेटवर्क के द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में विभिन्न जिलों व आंदोलनों से जुड़ी महिलाएं उपस्थित थी. इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलनकारी दयामनी बरला ने झारखंड के जनआंदोलनों से जुड़े अनुभवों को साझा किया.

दयामनी बरला ने कहा कि विस्थापन विरोधी आंदोलनों की सफलता के पीछे महिलाओं का ईमानदार नेतृत्व रहा है. उन्होंने कहा कि कोई भी आंदोलन महिलाओं की भागीदारी के बिना सफल नहीं हो सकता है. यह दुर्भाग्य है कि पुरुषवादी सोच महिलाओं के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करता है. उन्होंने कहा कि महिलाओं को खुद आगे आना होगा. उन्होंने झारखंड के लोकसभा और विधानसभा सीटों पर 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए.
झारखंड सामाजिक सांस्कृतिक आंदोलन की देन
प्रो संजय बसु मलिक ने कहा कि झारखंड राज्य एक सामाजिक सांस्कृतिक आंदोलन की देन है जिसमें महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने कहा कि कोई भी आंदोलन तभी सफल हो सकता है जब उसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी होगी.
रेणु दीवान ने कहा कि झारखंड के आंदोलनों में आदिवासी-गैरआदिवासी सभी महिलाओं की भूमिका रही है. लेकिन यह दुख की बात है कि राजनीतिक नेतृत्व महिला भागीदारी को स्वीकार नहीं करता है.
मौके पर जेरोम जेराल्ड कुजूर ने नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के खिलाफ आंदोलन में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में महिलाएं मुखर होकर आगे रही हैं. जबकि पुरुष उनके पीछे रहे हैं.
नेतरहाट आंदोलन की नेतृत्वकर्ता महिलाएं हुई सम्मानित
इस अवसर पर नेतरहाट जनआंदोलन में सक्रिय भागीदारी करनेवाली महिलाओं को सम्मानित किया गया. इन महिलाओं में मगदली कुजूर, तरशिला मिंज, मरियम कुजूर और इगनासिया आईंद शामिल थी.
कार्यक्रम के आयोजन में आदिवासी वीमेंस नेटवर्क की एलिना होरो, रेजिना, रोज खाखा, हीरा मिंज, मेरी निशा हांसदा सहित अन्य उपस्थित थी.