हूल दिवस पर राज्यभर में हुए कई कार्यक्रम, हूल के शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

रांची.

हूल दिवस के अवसर पर पूरे राज्य में कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ. साहेबगंज के भोगनाडीह में मुख्यमंत्री ने वीर सिदो कान्हों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने सिदो कान्हो के वंशजों से भेंट कर उन्हें सम्मानित किया.

हूल दिवस पर राज्यभर में हुए कई कार्यक्रम, हूल के शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

लोयला ट्रेनिंग सेंटर में जुटे विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि

रांची के डॉ कामिल बुल्के रोड स्थित  लोयला ट्रेनिंग सेंटर में विभिन्न संगठनों के सैकड़ो प्रतिनिधि जुटे. इस अवसर पर सभी ने झारखंड की अस्मिता, विशिष्ट जनजातीय मूलवासी संस्कृति,और जमन की रक्षा को लेकर हूल क्रांति की ज्योति जलाये रखने का संकल्प लिया. मौके पर फादर महेंद्र पीटर तिग्गा ने कहा कि आदिवासी समाज आज अपने इतिहास को खंगालने का प्रयास कर रहा है.हम उस मुहिम का हिस्सा हैं जहां अपने कल (भविष्य) को सुरक्षित करना है. हमे सोचना होगा कि कैसे झारखंड की जमीन, यहां की संस्कृति, यहां की आदिवासी जनता को बचाया जाये.

 फादर विपिन पानी ने कहा कि सिदो कान्हो ने जिस जमीन व संस्कृति के लिए शहादत दी वह जमीन अब हमसे छिनती जा रही है. इसलिए हूल के उस संघर्ष को याद करना जरूरी है. यह संघर्ष अपने, अपने परिवार के लिए जरूरी है. हमने जो इतिहास पढ़ा है उसमें 1857 के संघर्ष की बात है पर 1855 के संघर्ष की नहीं क्योंकि उनलोगों ने हमें कभी अपना माना ही नहीं. इसलिए अबुआ राज की बात होती है.रतन तिर्की ने कहा कि हूल दिवस को याद करना जरूरी है क्योंकि तभी अपनी भावी पीढ़ी, अपने भविष्य और अपनी संस्कृति को बचा सकेंगे. सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बरला, प्रेमचंद मुर्मू, फादर एलेक्स एक्का, प्रभाकर तिर्की सहित अन्य लोगों ने भी संबोधित किया. यह आयोजन वर्किंग पीपुल्स अलांयस, सोशल एनिशियेटिव्स फॉर ग्रोथ  एंड नेटवर्किंग, लोयला ट्रेनिंग सेंटर, हॉफमेन लॉ एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था.

हूल दिवस पर राज्यभर में हुए कई कार्यक्रम, हूल के शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

आदिवासी जनपरिषद ने सिदो कान्हो पार्क में माल्यार्पण किया

आदिवासी जन परिषद के तत्वावधान में सिदो कान्हों पार्क में सिदो कान्हो की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किया. परिषद ने इस दिन को संकल्प दिवस के रूप मनाया.

     इस कार्यक्रम  को संबोधित करते हुए परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि सिदो कान्हो ने 30 जून 1855 में अंग्रेजी हुकूमत, जमींदारों साहूकारों, ज्यादा लगान लेने के खिलाफ विद्रोह किया था. उन्होंने अंग्रेजों माटी छोड़ो का नारा दिया था.  आज के संदर्भ में कहना चाहता हूं कि झारखंड में एक और हूल की आवश्यकता है क्योंकि जिस प्रकार राज्य में आदिवासी जमीन की लूट हो रही है. स्थानीय लोगों को नौकरी नहीं मिल रही है. कारोबार पर अधिकार नहीं मिल रहा है उसी प्रकार झारखंड के जनता व नौजवानों को एक हूल आंदोलन को तेज करने की आवश्यकता है.

   कांके रोड सरना समिति के संयोजक डब्ल्यू मुंडा ने कहा कि आज के दिन 30 जून को हुल क्रांति दिवस मनाया जाता है और अंग्रेजो के खिलाफ लड़ने वाले आदिवासियों के 30 जून को उनके बलिदान को याद किया जाता है उस लड़ाई को तेज करने की जरूरत है.

 युवा मोर्चा के अध्यक्ष प्रदीप करमाली ने कहा कि झारखंड के नौजवानों को संगठित होकर झारखंड में हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने की आवश्यकता है.

   इस कार्यक्रम में महासचिव प्रकाश मुंडा आदिवासी जन परिषद  युवा मोर्चा के अध्यक्ष प्रदीप कुमार करमाली कांके रोड सरना समिति के अध्यक्ष डब्ल्यू मुंडा  महिला मोर्चा के उपाध्यक्ष सेलिना लकडा, सुप्रिया कश्यप,आदिवासी जन परिषद के रांची जिला अध्यक्ष सावना मुंडा , सिकंदर मुंडा, प्रदीप खलखो, संजीव वर्मा विक्की लोहरा, कुसुम लोहरा,परमेश्वर सिंह मुंडा आदि शामिल हुए.

हूल दिवस पर राज्यभर में हुए कई कार्यक्रम, हूल के शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

आदिवासी छात्र संघ ने माल्यार्पण किया

आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव के नेतृत्व मे सिदो कान्हो पार्क में हूल जननायक वीर शहीद सिदो कान्हो मुर्मू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया. इस मौके पर केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव ने कहा जब जब अन्याय और अत्याचार हुआ तब तब इस धरती पर वीर वीरांगना पैदा हुए. इन्ही वीर वीरांगनाअं में सिदो कान्हो के नेतृत्व में हुए हूल आंदोलन ने संथाल परगना में सुदूर पहाड़ी क्षेत्र में साहूकारों और अंग्रेजी हुकूमत को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिए.

जल, जंगल, जमीन के लिए आखिरी सांस तक लड़े सिदो कान्हो आज हमारे समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं. इस मौक़े पर केंद्रीय मीडिया प्रभारी सुमित उरांव, रांची जिला अध्यक्ष राजू कुमार उरांव, नगड़ी प्रखंड अध्यक्ष महादेव उरांव सहित अन्य उपस्थित थे. v

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