पिठौरिया में इंद मेला : सांसद संजय सेठ ने कहा-मेले की प्राचीनता ही इसकी महता को दर्शाता है

पिठौरिया में इंद मेला : सांसद संजय सेठ ने कहा-मेले की प्राचीनता ही इसकी महता को दर्शाता है

रांची।

पिठौरिया में पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ इंद मेले का आयोजन हुआ। मेले में मुख्य अतिथि के रूप में रांची के सांसद संजय सेठ शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इंद मेला की प्राचीनता ही इसकी महता को दर्शाता है। यह स्थल महाराज मथुरा मुंडा के साथ प्रथम नागवंशी महाराज फणिमुकुट राय की याद भी दिलाता है। विशिष्ट अतिथि कांके विधायक समरी लाल ने कहा कि यह मेला आदिवासी और गैर आदिवासियों की समानता और समरसता का उदाहरण है। सामाजिक सद्भाव का यही रूप इस मेले की मुख्य विशेषता रही है।

गौरतलब है कि महाराज मदरा मुंडा ने पड़हा पंचों की सहमति से सन 83 ईस्वी में जब अपनी राजगद्दी बालपोश पुत्र फणिमुकुट राय  को सौंपी उसी की याद में इन मेला की शुरुआत की गई। यह मेला 1941 वर्ष से नियमित रूप से इन मेला का आयोजन पिठोरिया के मदनपुर गांव में हो रहा है। इंद मेला का झारखंड  में लगने वाले मेलों में विशेष स्थान है।

इस मौके पर पाहन और पुरोहित के द्वारा विधिवत रूप से टोपर की  पूजा की गई। 12, 22, 24 और झुका पड़हा  समुदाय के लोग पारंपरिक वेशभूषा व हथियार के साथ में उपस्थित होकर मेले की शोभा बढ़ा रहे थे। वर्षा के व्यवधान के बावजूद लोगों को उत्साह  चरम पर था। सभी धर्म के मानने वाले लोग, विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथिगण और विविध भाषा बोलने वाले लोग की उपस्थिति से मेला की समरसता देखते बन रही थी। मेला के आयोजन में सुतियांबेगढ़ इंद मेला पड़हा समिति के अध्यक्ष रंजीत टोप्पो, कार्यकारी अध्यक्ष सोहराई टोप्पो, उपाध्यक्ष- फ्रांसिस लिंडा व तीर्थनाथ पाहन, महासचिव प्रो. भदी प्रकाश उरांव, कोषाध्यक्ष रामू उरांव, पड़हा राजा  उज्जवल पाहन सहित अन्य का योगदान सराहनीय रहा।

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