आदिवासी कल्याण आयुक्त की सीएसओ के साथ बैठक

रांची.
आदिवासी कल्याण आयुक्त की सीएसओ के साथ हुई बैठक में वन अधिकार पट्टा को लेकर जागरूकता फैलाने तथा काम में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है. सभी सीएसओ को कहा गया है कि वे वन पर निर्भर समुदायों को संगठित करने, वन अधिकार पर जागरुकता उत्पन्न करने, जमीनी स्तर पर व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकारों को दाखिल करने तथा सत्यापित करने का काम करें.
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर ज्यादा से ज्यादा लाभुकों को वन पट्टा का लाभ देने का निर्देश दिया गया है. बीते 14 सितंबर को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संबंधित विभागों की बैठक में भी समीक्षा कर वन अधिकार तथा पट्टा को लेकर अभियान चलाने की रूपरेखा व क्रियान्वयन पर चर्चा की गई थी. झारखंड के 32,620 गांवों में से 12,514 संभावित गांवों को इसका लाभ दिया जाना है.
गौरतलब है कि वन अधिकार अधिनियम 2006 भारत में वन पर निर्भर समुदायों के लिए ऐतिहासिक कानूनों में से एक है. जो न केवल व्यक्तिगत वन अधिकारों को मान्यता देता है, बल्कि समुदाय आधारित वन प्रबंधन अधिकार को भी मान्यता देता है. झारखंड में 2010 से ही यह अधिनियम पूर्णरूप से लागू है पर अभी भी बहुत कम लाभुकों को ही वन अधिकार पट्टा प्राप्त हुआ है.