
रामकृष्ण मिशन आश्रम में धुमकुड़िया पर परिचर्चा का आयोजन
रांची.
धुमकुड़िया को लेकर लोगों के मन में कई तरह के मिथ है. कुछ लोग इसे महज युवा गृह के रूप में मानते हैं. गैर जनजातीय समाज का ज्यादातर हिस्सा इसके बारे में तो जानता भी नहीं. इन्ही भ्रांतियों को दूर करने के लिए धुमकुड़िया पर परिचर्चा का आयोजन हुआ। यह परिचर्चाइंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, क्षेत्रीय शाखा रांची एवं रामकृष्ण मिशन विवेकानंद शैक्षिक और अनुसंधान संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था. इस परिचर्चा का विषय था-, समकालीन जनजातीय समाज में धुमकुरिया का महत्व।
परिचर्चा का उद्देश्य- धुमकुड़िया की संस्कृति, धार्मिक, सामाजिक-सांस्कृतिक राजनीतिक आर्थिक और धार्मिक आधारों के साथ-साथ सामूहिक जीवन शैली के बारे में चर्चा और ज्ञान का प्रसार करना था।
परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि धुमकुड़िया जनजातीय समाज की ऐसी संस्था है जिसका सामाजिक, धार्मिक, रणनीतिक, आर्थिक और शैक्षिक महत्व आदि काल से रहा है। बाहर के चिंतकों ने इसे युवा गृह के रूप में देखा था लेकिन, वास्तविकता यह है कि यह आदिवासी समाज का वह टकसाल है , जिसमें संपूर्ण व्यक्तित्व गढ़ा जाता था। धुमकुड़िया जनजातीय समाज के लिए सांस्कृतिक शिक्षा का केंद्र का प्रतिनिधित्व करता है। संस्था की मूल चिंता सामुदायिक युवाओं को एक आदर्श इंसान बनाना था।
परिचर्चा में रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी भावेशानंद महाराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थें जबकि विशिष्ट अतिथि साहित्यकार महादेव टोप्पो थे. मौके पर इंदिरा गांधी कला केंद्र के डॉ सपम रणबीर सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।