
जनजातीय शोध संस्थान में पूर्व आईपीएस मंजरी जरूहार की पुस्तक का हुआ पाठ
रांची.
बिहार की पहली महिला आईपीएस मंजरी जरूहार. अब सेवानिवृत हो चुकी हैं. पर बिहार के पारंपरिक पुरुषवादी समाज के बाद उन्होंने विपरीत परिस्थितियों से लड़कर अपनी पहचान बनायी. आईपीएस बनी और उसमें भी अपनी कार्यकुशलता का झंडा गाड़ा. मंजरी जरूहार शुक्रवार को रांची में थी. इस अवसर पर उनकी पुस्तक मैडम सर का पाठ मोरहाबादी स्थित डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान के सभागार में हुआ.यह पुस्तक उनकी आत्मकथा है. जिसमें उन्होंने अपने जीवन संघर्ष, और आईपीएस के तौर पर पेशेवर जीवन की स्मृतियों को साझा किया है.
मंजरी जरूहार एक पितृसत्तात्मक परिवार में पैदा हुई थी जहां औरतों के लिए तमाम तरह की बंदिशें थी. 19 साल की उम्र में ही उनकी शादी हो गई. पर उनके ख्वाब ऊंचे थे और इसलिए वे आगे पढ़ने के लिए दिल्ली आ गई. अपनी कड़ी मेहनत से उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की और 1976 में बिहार के पहली महिला आईपीएस के तौर पर चयनित हुई. आईपीएस ऑफिसर बनने के बाद भी उनके जीवन में कई चुनौतियां आई जिसका उन्होंने हिम्मत से सामना किया.
आज मंजरी जरूहार ने खुद भी अपने जीवन के अनुभवों को साझा किया. कार्यक्रम में शोध संस्थान के निदेशक रणेंद्र सहित अन्य उपस्थित थे.