(राम षोडषी पुष्पांजली) रमा है राम में जन मन जन जन में रमे हैं राम।१। समापन हुआ है अब प्रवास , राम राजेश्वर का वनवास।२। अज्ञान – वन में था निर्वासन, अब तो हृदय विराजो राम।३। राम आज राज में, राम आज काज में।४। राज और काज में समन्वय राम, राज में हुआ आज अभ्युदय …
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