
(राम षोडषी पुष्पांजली)
रमा है राम में जन मन
जन जन में रमे हैं राम।१।
समापन हुआ है अब प्रवास ,
राम राजेश्वर का वनवास।२।
अज्ञान – वन में था निर्वासन,
अब तो हृदय विराजो राम।३।
राम आज राज में,
राम आज काज में।४।
राज और काज में समन्वय राम,
राज में हुआ आज अभ्युदय राम।५।
आस्था और अस्मिता उभय,
धर्माधर्म का महा प्रलय।६।
हैं इस सबसे उच्चतर राम,
हर प्राणी का प्राणायाम ।७।
बीज मंत्र जीवन का राम,
जय जय राम राम राम।८।
आज है राम का,
कल भी राम का था।९।
कल रहेगा राम ही,
मर्यादा की रेखा राम।१०।
राम थे राम के आगे,
राम रहेंगे सदा आधार।११।
राम रहेंगे राम परे भी,
सृष्टि ओतप्रोत है राम।१२।
ब्रम्हांड में नाम गुंजायमान,
राम हैं नाम , नाम हैं राम।१३।
हे राम ! हे मेरे राम!
हमारे तुम्हारे उनके राम।१४।
अंतस में सुप्रतिष्ठित राम।
अब तो पहचानो कौन हैं राम।१५।
जय जय राम जय जय राम
हे राम हे सबके राम।१६।
(राम षोडषी पुष्पांजली)
~निवेदन: मौसमी घोष
रांची २२/०१/२४)