लंदन डायरी- 2 : बर्फ, ठंड, धूप और बारिश….जारी है क्रिसमस सेलीब्रेशन

रांची निवासी अंदलीब अनवर लंदन (यूके) में हैं. झारखंडनामा के लिए वे वहां के संस्मरण साझा कर रहे हैं. पत्रकार प्रवीण ने उनसे बातचीत के आधार पर इन संस्मरणों को शब्दों में उतारा है. यहां दूसरी किस्त में पढ़ें लंदन में क्रिसमस के उत्सव के बारे में.

RANCHI :

लंदन या तकरीबन पूरे यूके का मौसम अनोखा है. एक ही दिन में प्रकृति के अलग अलग नजारे दिख जाते हैं. कुछ दिनों पूर्व भारी बर्फबारी हुई थी. फिर बारिश और फिर धूप. कभी कभी एक ही दिन में ये सभी दिख जाते हैं. इसलिए यहां के मौसम को अप्रत्याशित कहा जाता है यानी कभी भी कुछ भी हो सकता है.

लंदन डायरी- 2 : बर्फ, ठंड, धूप और बारिश….जारी है क्रिसमस सेलीब्रेशन

 पर फिलहाल लंदन के लोग क्रिसमस की खुमारी में हैं. इस त्योहार का यूके में क्या महत्व है इसे इस तरह समझिए कि यह उन गिनेचुने दिनों में एक है जब देशभर में सभी स्कूल, कॉलेज, अन्य शिक्षण संस्थान, फैक्ट्रियां, कार्यालय और बाजार पूरी तरह से बंद होते हैं. सभी कोई क्रिसमस की छुट्टियों में सरोबर रहते हैं. मेरे बच्चों का स्कूल 19 दिसंबर को ही बंद हो गया था. बच्चों की छुट्टियां 3 जनवरी तक है तो उन्हें भी मस्ती करने और खेलने का मौका मिल गया है.

यह समय है परिजनों और मित्रों के साथ वक्त बिताने का

लंदन में 24 दिसंबर की मध्यरात्रि से ही सेलब्रेशन शुरू हो गया था. आतिशबाजी होने लगी थी. यह सेलीब्रेशन अभी नये साल के सेलीब्रेशन तक चलता रहेगा. लंदन जैसे अतिव्यस्त शहरों में यहीं समय है जब लोगों को सबसे ज्यादा मौका मिल पाता है अपने परिवारों, मित्रों या परिजनों के साथ वक्त बिता पाने का. यह समय है जब लोग अपनी व्यस्त और थका देनेवाली दिनचर्या से ब्रेक लेने का और खुद को रिचार्ज कर पाते हैं.

हालांकि यहां अपने देश तरह शोर नहीं है. आप कहीं पर भी लाउडस्पीकर नहीं बजा सकते. लाउडस्पीकर बजाने के लिए पहले से अनुमति लेनी होती है. यहां सख्त कानून है और उल्लंघन करने पर इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

मेरे घर के पास ही वॉकिंग डिस्टेंस पर एक चर्च है. क्रिसमस के अवसर पर वहां बड़ी संख्या में लोग प्रार्थना के लिए इकट्ठे हुए थे. बाजार और शॉपिंग कांपलेक्स में आकर्षक सजावट की गई है. मार्केटिंग प्लेस पर आकर्षक साज सज्जा से युक्त क्रिसमस ट्री दिख जाते हैं. यहां सांता क्लॉज की वेशवूषा में लोग बच्चों को उपहार बांटते दिख रहे हैं. सचमुच यह समय है खुशियों को बांटने का.

अलग अलग रंग, नस्ल, धर्म के बावजूद हम एक हैं

एक दूसरे देश का और दूसरे धर्म के होने के बावजूद इस ‍वक्त मैं इस देश में आकर इस उल्लास में खुद को शामिल पा रहा हूं. मुझे लगता है कि अलग-अलग देशों, नस्ल, रंग, धर्म और वर्ग के बावजूद ये त्योहार हमें यह सिखाते हैं कि दरअसल हम एक हैं- इंसान… और इस नाते, इंसानियत के मद्देनजर…. हमें एक दूसरे की कद्र करनी चाहिए.

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