पंचपरगना का क्षेत्रीय पर्व है टुसू इस पर सिर्फ कुर्मियों का दावा गलत

 Ranchi :

कुर्मी/कुडमि जाति के लोग आदिवासी लिस्ट में शामिल होने की लालसा में अपनी विशिष्ट संस्कृति को दिखाने की कोशिश में दूसरे जातियों के पर्व त्यौहार, भाषा संस्कृति और इतिहास के नायकों को अपना जाति का बताकर दुष्प्रचार कर रहे हैं. इसकी वजह से समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है. उक्त बातें राष्ट्रीय आदिवासी मुंडा परिषद के महासचिव आनंद सिंह मुंडा ने बयान जारी कर कहा है.

पंचपरगना का क्षेत्रीय पर्व है टुसू इस पर सिर्फ कुर्मियों का दावा गलत

आनंद मुंडा ने कहा कि एक तरह से यह सांस्कृतिक चोरी की तरह है. इससे पहले इन लोगों ने भूमिज मुंडाओं के चूहाड विद्रोह के नेता रघुनाथ सिंह भूमिज को रघुनाथ महतो बताकर चूहाड विद्रोह का श्रेय लेने का प्रयास किया. जबकि इस मामले में ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि चूहाड़ विद्रोह में कुरमियों की कोई भूमिका नहीं थी. इसके बाद करमाली जाति की भाषा कुड़माली को अपना जातीय भाषा बताने की कोशिश की है. इतना ही नहीं,  अब पंच परगना क्षेत्र के क्षेत्रीय पर्व को अपना बताने की कोशिश कर उसका राजनीतिकरण किया जा रहा है.

 पंच परगना के सोनाहातू प्रखंड के गांव बरेंदा के सती घाट से शुरू हुआ टुसू परब को अब हर महतो गांव में जातीय परब का रूप दिया जा रहा है. जिसकी याद में यह पर्व मनाया जाता है यानी सती टुसुमनी नामक वह युवती जिसने मुगल आक्रांताओं से अपनी इज्जत बचाने के क्रम में सतीघाट में कूदकर अपनी जान दे दी थी. उसे भी कुर्मी/कुडमि जाति के लोग अपना बताकर भ्रम फैला रहे हैं. जबकि पंचपरगनिया और बांग्ला लोक कथा एवं लोकगीतों के अनुसार टुसुमनी कुम्हार जाति की थी.

टुसू परब पंच परगना का क्षेत्रीय पर्व है, इससे क्षेत्र के सभी जातियों के लोग मुंडा सहित उल्लास के साथ मनाते आए हैं. या किसी जाति विशेष से संबंधित नहीं इसका एक जाति द्वारा अपना बताकर प्रचार करना निंदनीय है। इसका विरोध किया जाना चाहिए. क्योंकि गांव में कुर्मी पॉलिटिक्स हावी हो रहा है.

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