लोकतंत्र की जननी है भारत

रांची:
भारत लोकतंत्र की जननी है. विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत है. जब हमारा संविधान बना तो यह स्वतंत्रता संग्राम के उच्चतम आदर्शों को प्रतिबिंबित करता था. उक्त बातें झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने कही. वे संविधान जगार जतरा समिति के तत्वावधान मे आयोजित विमर्श संविधान ही समाधान विषय पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थें. उन्होंने समिति के द्वारा प्रस्तावित मांग पर सहमति व्यक्त की जिसमें कहा गया था कि संविधान सभा में शामिल झारखंड के तीन व्यक्तियों की तस्वीर झारखंड विधानसभा में लगनी चाहिए।
समिति के सदस्य बलराम ने कहा कि, इस देश में अगर सबसे कम बात हुई है तो वह संविधान पर हुई है अगर सबसे कम पढ़ा गया है तो वह संविधान की पुस्तक है इसलिए संविधान को जानना और समझना जरूरी हैं.
बलराम ने कहा कि , देश की आजादी को बनाए रखने के लिए संविधान को जानना मानना और उसके अनुरूप आचरण करना जरूरी है उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की उद्देशिका प्रस्तावना इसका सबसे खूबसूरत हिस्सा है जिसकी शुरूआत ही हम भारत के लोग से होती है.
समिति के सदस्य प्रभाकर तिर्की ने कहा कि , संविधान निर्माण करने के काम में लगे लोगों में इतनी ज्यादा गंभीरता थी कि वह देश के सभी हिस्सों के लोगों का ख्याल रखा उन्होंने बताया की झारखंड का क्षेत्र देश के 10 उन राज्यों में आता है जो संविधान के तहत पांचवी अनुसूची में शामिल है इन क्षेत्रों में देश का सामान्य कानून पूरी तरह से लागू नहीं हो सकता क्योंकि यहां की भौगोलिक परिस्थिति और लोग देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं.
रतन तिर्की ने कहा कि हमारा उद्देश्य देश को एक करना हैं. यह कार्यक्रम उसी कड़ी के तहत हैं. हम गांव व शहर के लोगों को संविधान की जानकारी देने की क कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमें यह आंकलन करने की जरूरत है कि कि हम संविधान को कितना जानते समझते हैं और क्या हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा कर पा रहे हैं या नहीं?
कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन की सदस्य यशस्विनी सहाय ने संविधान के तहत पोक्सो एक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी उन्होंने कहा कि यह एक मुख्य रूप से बच्चों के यौन उत्पीड़न व शोषण से संबंधित है यह काफी मजबूत एक्ट है पर जानकारी के अभाव में अभी भी इसके तहत बहुत कम मामले दर्ज हो पाते हैं उन्होंने कहा कि महिलाओं व बच्चों के खिलाफ किसी भी तरह के शोषण के खिलाफ संवैधानिक प्रावधानों के तहत आवाज उठायी जा सकती है. प्रबल महतो सहित अन्य ने भी कार्यक्रम में संबोधित किया. इस अवसर पर पुष्कर महतो सहित अन्य उपस्थित थे.