लेप्रोसी सामान्य बीमारी की तरह, चैंपियन लोगों को घर-घर जाकर करेंगे जागरूक

लेप्रोसी भी अन्य बीमारियों की तरह की सामान्य बीमारी है. जिसका इलाज पूरी तरह से संभव है. इसके लिए मुफ्त दी जाने वाली दवाएं सभी गवर्नमेंट हॉस्पिटलों में भी उपलब्ध है. इतना ही नहीं अब लेप्रोसी की दवाएं मेडिकल कॉलेजों के ट्रीटमेंट सेंटर में भी उपलब्ध कराई जाएगी. जिससे कि मरीजों का पूरी तरह से इलाज किया जा सकेगा. ये बातें डॉ कृष्ण कुमार ने इंटीग्रेशन आफ मेंटल हेल्थ सर्विसेज फॉर लेप्रोसी पेशेंट्स पर आयोजित वर्कशॉप में कही. साथ ही उन्होंने कहा कि अब मरीजों को जागरूक करने के लिए ब्लाक लेवल पर लेप्रोसी चैंपियन को तैयार किया जाएगा. जो मरीजों के पास जाकर उनकी काउंसेलिंग भी करेंगे. वहीं इस काम के लिए स्कूल टीचर्स की भी मदद ली जाएगी. बताते चलें कि हेल्थ डिपार्टमेंट सीआइपी के साथ मिलकर मरीजों के मेंटल हेल्थ को लेकर भी अभियान चलाया जाएगा. मौके पर डीजीएचएस के डॉ अनिल कुमार, डॉ सुदर्शन मंडल मौजूद थे.

दवा से इलाज है संभव

डॉ सुदर्शन मंडल ने कहा कि यह बीमारी बैक्टीरिया की वजह से होती है. जिसे दवा से ठीक किया जा सकता है. वहीं जरूरत पड़ने पर रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी भी की जा रही है ताकि बॉडी के पार्ट्स को बचाया जा सके. इस बीमारी को लेकर मरीज मानसिक रूप से बीमार हो जाते है. वहीं समाज से उन्हें बाहर कर दिया जाता है. ऐसी स्थिति में वे डिप्रेशन से गुजरते है. इसी को दूर करने के लिए उनकी काउंसेलिंग की जाएगी. फिलहाल झारखंड में लेप्रोसी के 5442 नए लेप्रोसी केस मिले. जो कोविड के बाद दो सालों में मिले है. जिनका ट्रीटमेंट शुरू कर दिया गया है.

मेंटल डिप्रेशन की चपेट में मरीज


वहीं डॉ अनिल कुमार ने बताया कि एक्टिव केस डिटेक्शन से मरीजों का इलाज संभव है. उन्होंने कहा कि चार राज्यों में सर्वे किया गया था. झारखंड में लेप्रोसी के ज्यादा मरीज है. वहीं सर्वे में एक और बात सामने आई कि 33 परसेंट मरीज मेंटल डिप्रेशन के शिकार थे. वहीं 19 परसेंट मरीजों में एग्जाइटी की समस्या थी. ऐसे मरीजों के लिए ट्रीटमेंट डॉक्टरों को एक हफ्ते की ट्रेनिंग सीआईपी और रिनपास में दी जाएगी. इसके बाद इलाज के लिए आने वाले मरीजों की इलाज के साथ काउंसेलिंग भी की जाएगी. उन्होंने कहा कि झारखंड पहला स्टेट है जहां यह शुरुआत की जा रही है. इसके बाद अन्य राज्यों में भी इसे लागू किया जाएगा.

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