प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के सामने खिलाएं फाइलेरिया की दवा

RANCHI: झारखंड सरकार, लिम्फेटिक फाइलेरिया (हाथीपांव) के उन्मूलन 2023 को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 10 फरवरी झारखण्ड के 15 फाइलेरिया प्रभावित जिलों (लोहरदगा हजारीबाग, बोकारो देवघर धनबाद गुमला, कोडरमा, पाकुड़, रामगढ़, साहिबगंज, सिमडेगा, गढवा, पू सिंहभूम, प सिंहभूम और रांची) में कोरोना के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए दवा खिलाई जाएगी। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह की अध्यक्षता में स्टेट टास्क फोर्स की बैठक हुई। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि एमडीए कार्यक्रम के दौरान सभी गतिविधियाँ ठीक से हों और कोई भी कमी न रह जाये। उन्होंने कहा कि मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के दौरान फाइलेरिया रोधी दवाओं का वितरण नहीं, बल्कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के सामने दवा का सेवन सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री का ऑडियो सन्देश लोगों तक पहुंचाए

प्रचार प्रसार भी सुनिश्चित किया जाए जिससे समुदाय में इस कार्यक्रम के प्रति जागरूकता बढ़े। इसके साथ ही, राज्य स्तर से सभी विभागों के साथ समन्वय बनाकर कार्यक्रम के दौरान आने वाली किसी भी समस्या का त्वरित समाधान किया जाये। उन्होंने यह भी कहा कि टास्क फ़ोर्स को बहुत गंभीरता से मॉनिटरिंग करनी होगी। उन्होंने बैठक में उपस्थित कृषि विभाग, पंचायती राज एवं झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के मुख्यमंत्री के फाइलेरिया रोग से सम्बंधित ऑडियो सन्देश को लोगों तक पहुंचाया जाये।

लोगों से पूछे तो बढ़ेगी जागरूकता

उन्होंने कहा कि एक अभियान चलाया जाए और लोगों से पूछा जाएं कि क्या आपने फ़ाइलेरिया रोधी दवाएं खाईं ? इससे लोगों में इस रोग के प्रति निश्चित रूप से जागरूकता बढ़ेगी। राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, वेक्टर बॉर्न डिजीज डॉ अनिल कुमार ने बताया 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी लोगों को उम्र के अनुसार डीईसी और अलबेंडाजोल की निर्धारित खुराक खिलाई जाएगी।

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