मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक से मिला जन संगठनों का प्रतिनिधिमंडल

मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक से मिला जन संगठनों का प्रतिनिधमंडल

झारखंड जनाधिकार महासभा, साझा मंच समेत कई संगठनों ने राज्य में धार्मिक व सामुदायिक सद्भाव तोड़ने वाली जन सभाओं व सोशल मीडिया पोस्ट्स के विरुद्ध कार्र्वाई की मांग की है

रांची।

झारखंड जनाधिकार महासभा, साझा मंच, आदिवासी अधिकार मंच, अंबेडकर विचार मंच समेत कई संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक से मिलकर राज्य में धार्मिक व सामुदायिक सद्भाव तोड़ने वाली जन सभाओं व सोशल मीडिया पोस्ट्स के विरुद्ध कार्यवाई की मांग की है। मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक ने त्वरित कार्यवाई का आश्वासन दिया।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विभिन्न अंगों (जैसे बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद आदि) से जुड़े नेता हाल के दिनों में रांची समेत अन्य जिलों में जन सभाओं का आयोजन कर मुसलमानों व ईसाईयों के विरुद्ध भड़काऊ भाषण दे रहे हैं। हाल में, 24 जुलाई 2023 को सुकुरहुटु, कांके, रांची में आयोजित जन सभा में एक हिन्दुत्ववादी नेता ने सभा में लोगों को हिन्दू धर्म के नाम पर मुसलमानों व ईसाईयों के विरुद्ध भड़काया। उसने हाल में मणिपुर में हुई हिंसा के मामले में धार्मिक नफरत व उन्माद फैलाने के उद्देश्य से झूठी बातों को तथ्यों के रूप में पेश किया और ईसाईयों व आदिवासियों के विरुद्ध बोला। साथ ही, मुसलमानों के विरुद्ध भी कई आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर भड़काऊ भाषण दिया गया। । लोगों को मुसलमानों के विरुद्ध हिंसा के लिए प्रेरित किया गया। लोगों को हिन्दू धर्म के नाम पर धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध भड़काया गया। साथ ही, लोगों को हिन्दू राष्ट्र के पक्ष में भी गोलबंद किया गया।

हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना गैर संवैधानिक है। यह भाषण स्पष्ट रूप से भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं जैसे 153A, 153B, 295A, 505(1) आदि अंतर्गत अपराध है। प्रतिनिधिमंडल ने तुरंत इन धाराओं अंतर्गत कार्र्रवाई की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने महानिदेशक को बताया कि यह भाषण व सभा एक उदाहरण मात्र है। ऐसी सभाओं का आयोजन रांची के विभिन्न गावों में किया जा रहा है एवं भैरव सिंह द्वारा ऐसे भाषण लगातार दिए जा रहे है। कई सभाओं में मुसलमानों का आर्थिक बहिष्कार करने की भी बात बोली गयी है। अन्य जिलों में भी इस तरह की सभाएं कर झारखंडी समाज को तोड़ने का कार्य किया जा रहा है। इस प्रकार के भाषण पर अगर रोक न लगे व ऐसे लोगों पर कार्रवाई न हुई, तो यह हमारे संविधान की धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा व समाज को छिन्न भिन्न कर देगा एवं संविधान की धारा 14 में स्थापित बराबरी के अधिकार व धारा 21 में स्थापित बराबर नागरिकता के अधिकार को कमजोर करेगा।

प्रतिनिधिमंडल ने महानिदेशक को सर्वोच्च न्यायालय के अश्विनी कुमार उपाध्याय वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया एंड अदर्स (रिट पिटिशन (सिविलl) संख्या. 943/2021) मामले में निदेश का याद दिलाया। न्यायालय ने राज्य व केंद्र को स्पष्ट आदेश दिया है कि हेट स्पीच के मामलों में बिना शिकायत के ही सुअ मोटो प्राथमिकी दर्ज कर कार्यवाई की जानी है। लेकिन यह अत्यंत दुख की बात है कि पुलिस व प्रशासन द्वारा न ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्यवाई की जा रही है और न ही ऐसी सभाओं को रोका जा रहा है।

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