डायन के नाम पर प्रताडित दंपती को 8 महीने बाद भी न्याय नहीं

डायन के नाम पर प्रताडित हुई ललिता कथरीना आईंद और उसके पति को 8 महीने बाद भी न्याय नहीं

रांची.

डायन बिसाही के नाम पर ललिता (कथरीना) आईंद और उसके पति निकोलस नगडुबार को 8 महीने के बाद भी न्याय नहीं मिला है. वे अपने गांव और घर छोड़कर रांची में रहने को विवश हैं. फिलहाल उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता रतन तिर्की ने पनाह दी है.

पीडित दंपती, रांची के नगड़ी थाना क्षेत्र स्थित बालालौंग पंचायत के जराटोली गांव के निवासी है. पिछले साल 30 अगस्त को गांव में मीटिंग करने के बाद 60 वर्षीय ललिता (कथरीना) के साथ मारपीट की गई. दरअसल महिला के सिर पर जटा जैसे बाल थे और गांव के लोगों को लगता था कि वह डायन है और जादू टोना करती है. गांव में आनेवाली सारी विपत्तियों की ज़ड़ उसे ही माना जाता था.

गांव की मीटिंग में महिला और उसके पति की हत्या करने की सारी योजना बना ली गई थी. फादर महेंद्र पीटर तिग्गा को यह सूचना मिली और फिर सामाजिक कार्यकर्ता रतन तिर्की को. इस बात की सूचना पुलिस को भी दी गई और फोर्स भेजने का आग्रह किया गया. पुलिस फोर्स के पहुंचने से पहले ही महिला और उसके पति के साथ मारपीट शुरू कर दी गई थी. उसका बायां हांथ तोड़ दिया गया था.

सिर, कमर और पैरों पर भी काफी चोट लगी थी. उसके पति का भी दांत तोड़ दिया गया था. पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं के पहुंचने से इस बुजुर्ग दंपती की जान बच गई. हालांकि उस समय भी गांव के लोग जिसमें महिला पुरूष दोनों थे काफी उग्र थे.  इस घटना के बाद महिला की चिकित्सा जांच कराई गई और मामले में थाना में शिकायत दर्ज कराई गई.

सामाजिक कार्यकर्ता रतन तिर्की ने कहा कि इस घटना के 8 महीने बीत चुके हैं. अभी भी महिला और उसके पति अपने गांव वापस नहीं लौट पा रहे हैं. घटना के आरोपी अभी भी गांव में खुले आम घूम रहे हैं. पुलिस ने मामला दर्ज होने के बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की है. उन्हें अपने मवेशियों और घर की चिंता सता रही है और इस बात की भी कि इस वर्ष खेती भी नहीं कर पायेंगे.

पर उससे भी बड़ा सवाल यह है कि आखिर लगातार डायन बिसाही के खिलाफ प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं के द्वारा प्रचार प्रसार करने और डायन कुप्रथा के खिलाफ कानून होने के बाद भी इस तरह की घटनाओं में कोई कमी नहीं आ रही ? आखिर कब तक ललिता कथरीना जैसी महिलाएं इस अंधविश्वास की बलि चढ़ती रहेगी?

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