
RANCHI: झारखंड में कोरोना के केस अचानक से भले ही बढ़ गए है। लेकिन लोगों में इसके ज्यादा लक्षण दिखाई नहीं दे रहे है। इसका ज्यादा प्रभाव वैसे लोगों पर देखने को मिल रहा है जिनकी इम्युनिटी कमजोर है या फिर उन्हें किसी न किसी बीमारी ने चपेट में ले रखा है। यह कहना है डॉ जितेंद्र कुमार, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, सीसीएल, गांधीनगर का। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि कोविड वायरस कमजोर हो गया है। बल्कि कोरोना के पूर्व एक्सपोजर, हेल्दी डाइट-डेली रूटीन ने लोगों की इम्युनिटी को मजबूत बनाया है। इसके अलावा वैक्सीन का रोल सबसे अहम रहा। यहीं वजह है कि अब लोग कोरोना से लड़ रहे है। फिर भी इसे हल्के में लेने की जरूरत नहीं है। किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर एक्सपर्ट से तत्काल कंसल्ट करे। जिससे कि बीमारी को समय रहते कंट्रोल किया जा सके।
नए वैरिएंट के अलग है लक्षण
कोविड का वायरस म्यूटेशन करके खुद को अपग्रेड भी कर रहा है। फिलहाल कोविड का जीआई वैरिएंट लोगों में मिला है। जिसमें सर्दी के साथ पेट खराब होने की शिकायत है। ऐसे ही मरीज इलाज के लिए हॉस्पिटलों में पहुंच रहे है। इसलिए ऐसा कोई भी लक्षण दिखाई दे तो डॉक्टर से संपर्क करे और टेस्ट जरूर कराएं। इससे दूसरों को इंफेक्शन से बचाया जा सकता है।
एंटीबॉडी वायरस से लड़ने में सक्षम
उन्होंने कहा कि कोविड की पहली और दूसरी लहर में काफी संख्या में लोग चपेट में आए। इस दौरान मॉर्टलिटी रेट भी अधिक था। तीसरी लहर में लोग अपनी रूटीन से लेकर डाइट को लेकर जागरूक हुए और फिर वैक्सीन भी ली। इससे इम्युनिटी डेवलप हुई। जिन्होंने वैक्सीन की दूसरी डोज ली उनके अंदर एंटी बॉडी डेवलप हुआ। जिस वजह से नए वायरस का असर कम हो रहा है। यूं कहे तो लोगों के शरीर में इतनी एंटीबॉडी का निर्माण हुआ जो वायरस से लड़ने में सक्षम है।